भारतीय क्रिकेट में चयन समिति के चेयरमैन के तौर पर अजीत अगरकर का कार्यकाल अब समाप्त हो गया है। अपने कार्यकाल में अगरकर के सामने टीम इंडिया को मजबूत बनाने और बड़े टूर्नामेंटों के लिए संतुलित टीम तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी थी। इस दौरान भारतीय टीम ने तीन आईसीसी ट्रॉफियां अपने नाम कीं। हालांकि, मैदान पर मिली इन बड़ी सफलताओं के साथ चयन और खिलाड़ियों से जुड़े कई विवाद भी अगरकर के कार्यकाल में चर्चा का विषय बने।
अगरकर ने जुलाई 2023 में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की चयन समिति के अध्यक्ष का पद संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप 2024, चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 में खिताब जीते। लगातार बड़े आईसीसी टूर्नामेंटों में सफलता ने चयन समिति के कामकाज को मजबूती दी और भारतीय क्रिकेट में अगरकर की भूमिका को अहम बनाया।
रोहित शर्मा को लेकर हुआ विवाद
अगरकर के कार्यकाल की सबसे ज्यादा चर्चा रोहित शर्मा को लेकर हुई। टेस्ट और वनडे क्रिकेट में रोहित की भूमिका, कप्तानी और भविष्य को लेकर कई बार सवाल उठे। टी20 विश्व कप 2024 के बाद रोहित ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। इसके बाद भारतीय क्रिकेट में कप्तानी और नेतृत्व को लेकर नए समीकरण बने।
रोहित के टेस्ट क्रिकेट से जुड़े फैसलों और बाद में उनके भविष्य को लेकर भी काफी चर्चा रही। चयन समिति और टीम प्रबंधन के फैसलों को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आती रहीं। हालांकि, टीम इंडिया की लगातार सफलता के कारण इन विवादों का असर मैदान पर कम ही दिखाई दिया।
लक्ष्मण के साथ मतभेद की खबरें
अगरकर के कार्यकाल में पूर्व भारतीय बल्लेबाज और तत्कालीन कोचिंग व्यवस्था से जुड़े वीवीएस लक्ष्मण के साथ कथित मतभेद भी सुर्खियों में रहे। टीम चयन और क्रिकेट संबंधी फैसलों को लेकर दोनों के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रही थीं। हालांकि, इन चर्चाओं को लेकर सार्वजनिक तौर पर बहुत कम जानकारी सामने आई।
युवा खिलाड़ियों पर भी रहा जोर
अगरकर की चयन समिति ने युवा प्रतिभाओं को मौका देने पर भी जोर दिया। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ियों को भारतीय टीम में जगह मिली। चयन समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभवी खिलाड़ियों और उभरती प्रतिभाओं के बीच संतुलन बनाने की थी।
अगरकर के कार्यकाल का सबसे मजबूत पक्ष आईसीसी टूर्नामेंटों में मिली सफलता रही। तीन बड़ी ट्रॉफियों ने उनके कार्यकाल को उपलब्धियों से भर दिया। वहीं, रोहित शर्मा से जुड़े फैसले, कप्तानी के बदलाव और लक्ष्मण के साथ कथित मतभेद जैसे मुद्दे उनके कार्यकाल की दूसरी तस्वीर पेश करते हैं। अब नए चयन प्रमुख के सामने टीम इंडिया की इस सफलता को आगे बढ़ाने और अगले बड़े टूर्नामेंटों के लिए मजबूत टीम तैयार करने की चुनौती होगी।


