कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की गिरफ्तारी और उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे उनके माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तिरंगा फहराने को लेकर अपने सहयोगियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अंकिता के माता-पिता की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि क्या न्याय मांगना अपराध है? इन घटनाओं के बाद विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर चिंता जताई है।
‘तिरंगा फहराने पर जेल में डाला’, दिपके ने उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने अपने सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में तिरंगा फहराने पर लोगों को जेल क्यों भेजा जा रहा है। दिपके ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाने की कोशिश बताया और केंद्र सरकार की आलोचना की।
दिपके के मुताबिक, राष्ट्रीय ध्वज फहराना और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना अपराध नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति होने का आरोप भी लगाया। ये दिपके के आरोप हैं; पुलिस ने प्रदर्शन से संबंधित अलग कारणों और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ कथित दुर्व्यवहार की भी निंदा की।
सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है। यह स्थान हाल ही में प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाया गया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और सरकारी कामकाज में बाधा डाली। वहीं, सीजेपी और विपक्षी नेताओं का कहना है कि कार्रवाई ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सवाल खड़े किए हैं।
अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत पर खरगे नाराज
दूसरी ओर, अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे उनके माता-पिता को दिल्ली में इंडिया गेट के पास हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि न्याय की मांग करने वाले परिवार के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड में एक रिसॉर्ट में काम करती थीं और सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में न्याय और कथित प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। उनके माता-पिता की मांगों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन ने इस मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
अंकिता के परिवार की क्या है मांग?
अंकिता भंडारी के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर रातभर प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग है कि मामले की सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। इस मांग के पीछे अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठ रहे सवाल हैं। हालांकि, गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है और मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है।
पुलिस ने गुरुवार तड़के अंकिता के माता-पिता और प्रदर्शन में शामिल कुछ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस और केंद्र सरकार की आलोचना की।
खरगे बोले- कांग्रेस न्याय की लड़ाई जारी रखेगी
मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एक बेटी को खो चुके माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार शर्मनाक और निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय की मांग कर रहे परिवार को हिरासत में लिया गया, जबकि भाजपा के एक नेता को राज्यपाल का पद दिया गया। खरगे ने कहा कि कांग्रेस अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
इस पूरे घटनाक्रम में दो मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं—सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और अंकिता भंडारी के परिवार की न्याय की मांग। एक ओर दिपके ने तिरंगा फहराने और विरोध करने के अधिकार पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर खरगे ने पीड़ित परिवार के साथ हुए व्यवहार को लेकर सरकार को घेरा है। अब इन मामलों में आगे की पुलिस और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।


