भारतीय वायुसेना को नया नेतृत्व मिल गया है। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले संबोधन में उन्होंने बदलते युद्ध के स्वरूप और देश की सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि ड्रोन, लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियार, अंतरिक्ष, साइबर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकें युद्ध लड़ने के पारंपरिक तरीकों को बदल रही हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना को अगले दशक की जरूरतों के मुताबिक आधुनिक बनाने के साथ हर समय युद्ध लड़ने और जीतने के लिए तैयार रहना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
नए वायुसेना प्रमुख ने अपने पूर्ववर्ती एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के कार्यकाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी सटीक और निर्णायक हवाई ताकत का प्रदर्शन किया था। उन्होंने एपी सिंह का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें एक मजबूत और पूरी तरह तैयार वायुसेना की जिम्मेदारी मिली है।
दीक्षित ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने कहा कि शहीदों का साहस और समर्पण वायुसेना के जवानों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।
क्या है नए एयर चीफ का ‘VAYU’ मंत्र?
आशुतोष दीक्षित ने अपनी प्राथमिकताओं को अंग्रेजी शब्द VAYU के चार अक्षरों में समझाया। इसके जरिए उन्होंने वायुसेना के भविष्य का रोडमैप पेश किया।
V- विजिलेंस और तत्परता: उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्क्वाड्रन, रडार, एयर डिफेंस यूनिट और वायुसेना के जवान को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या को स्वीकृत स्तर तक पहुंचाना भी उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
A- आत्मनिर्भरता: वायुसेना को स्वदेशी तकनीक और हथियारों से मजबूत किया जाएगा। तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे कार्यक्रमों को प्राथमिकता मिलेगी। स्वदेशी सेंसर और हथियारों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा।
Y- युक्ति और नवाचार: इसमें AI आधारित कमांड और कंट्रोल सिस्टम, ड्रोन रोधी तकनीक, सैन्य ठिकानों की सुरक्षा और नई युद्ध रणनीतियों को शामिल किया गया है। अंतरिक्ष के निकटवर्ती क्षेत्र को भी सैन्य अभियानों के लिए उपयोगी बनाने पर काम होगा।
U- एकजुट प्रयास: थलसेना, नौसेना, वायुसेना और राष्ट्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाएगा। उनका मानना है कि हवाई ताकत का सबसे प्रभावी इस्तेमाल तभी संभव है, जब उसे सैन्य अभियान की शुरुआती योजना से ही शामिल किया जाए।
ड्रोन और AI से क्यों बदल रहा युद्ध?
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों में ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। अब दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के लिए लड़ाकू विमानों को सीधे सीमा पार भेजना हमेशा जरूरी नहीं रह गया है। सटीक निशाना लगाने वाले हथियार दूर से ही महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। ड्रोन के झुंड एयर डिफेंस सिस्टम के सामने नई चुनौती पैदा कर रहे हैं। वहीं, AI से निगरानी, लक्ष्य की पहचान और सैन्य निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
स्वदेशी ताकत पर रहेगा जोर
नए वायुसेना प्रमुख का संदेश स्पष्ट है कि भारत को आधुनिक तकनीक के साथ अपनी सैन्य आत्मनिर्भरता भी बढ़ानी होगी। उनका लक्ष्य ऐसी वायुसेना तैयार करना है, जो किसी भी चुनौती का तुरंत जवाब दे सके। इसके लिए तकनीकी आधुनिकीकरण, लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने, स्वदेशी हथियारों और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


