कांग्रेस नेता राहुल गांधी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच मतदाता सूची, कथित वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सियासी टकराव जारी है। इसी बीच भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक समर्थन सैर-सपाटे से नहीं, बल्कि मेहनत और जनता के बीच लगातार काम करने से मिलता है। भाजपा ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन और उसके नेतृत्व की रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं। कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर 23 अक्टूबर को मतपत्रों से मतदान हुआ था। 28 अक्टूबर को घोषित नतीजों में भाजपा ने तीन और जेडीएस ने एक सीट जीती, जबकि कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।
राहुल गांधी पर क्या बोले सुधांशु त्रिवेदी?
भाजपा नेता ने राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियों और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को जनता का समर्थन हासिल करने के लिए जमीन पर काम करना चाहिए। भाजपा का तर्क है कि चुनावों में सफलता के लिए संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बनाए रखना और मतदाताओं के बीच लगातार सक्रिय रहना जरूरी है।
त्रिवेदी इससे पहले भी मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस के रुख में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए पूछा था कि यदि पहले पार्टी मतदाता सूची में गड़बड़ियों और दोहरे नामों की शिकायत कर रही थी, तो अब सत्यापन की प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों जता रही है। ये भाजपा की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर दोनों दलों के बीच मतभेद बना हुआ है।
वोट चोरी के आरोपों पर भाजपा का जवाब
राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता जरूरी है और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
एमएलसी चुनाव के नतीजों से भी गरमाई राजनीति
विधान परिषद चुनावों के नतीजों ने भी भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी को हवा दी है। 28 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कर्नाटक की चार विधान परिषद सीटों पर भाजपा और उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) ने जीत दर्ज की। इनमें भाजपा ने तीन और जेडीएस ने एक सीट हासिल की, जबकि कांग्रेस इन चारों सीटों पर जीत दर्ज नहीं कर सकी
इन नतीजों के बाद भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का एक और अवसर मिला है। हालांकि, विधान परिषद चुनावों के परिणामों को सीधे लोकसभा या विधानसभा चुनावों के जनादेश के समान नहीं माना जा सकता, क्योंकि इन चुनावों के मतदाता वर्ग और निर्वाचन प्रक्रिया अलग होते हैं।
चुनाव आयोग को लेकर क्यों आमने-सामने हैं दोनों दल?
SIR और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस के बीच विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदान के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
कांग्रेस जहां पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दे रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची का सत्यापन निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की भूमिका और उसके फैसलों पर भी चर्चा जारी है।


