भारत के दिग्गज पैरा एथलीट नीरज यादव का 42 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक और चक्का फेंक स्पर्धाओं में तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया था। उनके निधन की खबर से भारतीय पैरा एथलेटिक्स जगत में शोक की लहर है। भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण ने उनके निधन की पुष्टि की है। शुरुआती रिपोर्टों में आत्महत्या की बात सामने आई है, हालांकि इसके पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। मामले की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
2018 में एशियाई रिकॉर्ड के साथ जीता था स्वर्ण
उत्तर प्रदेश के रहने वाले नीरज यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भाला फेंक और चक्का फेंक में बनाई थी। वर्ष 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने पुरुषों की एफ55 भाला फेंक स्पर्धा में 29.84 मीटर का थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता था। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया था।
इसके बाद चीन के हांगझोऊ में 2023 में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में नीरज ने दो और स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक, दोनों स्पर्धाओं में शीर्ष स्थान हासिल किया। इस तरह उनके नाम एशियन पैरा गेम्स के तीन स्वर्ण पदक दर्ज हुए।
सात साल की उम्र में हुआ था पोलियो
नीरज यादव को सात साल की उम्र में पोलियो होने का पता चला था। इसके बावजूद उन्होंने खेलों में अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने लगभग सात साल तक व्हीलचेयर टेनिस खेला और बाद में पैरा एथलेटिक्स की ओर रुख किया।
वर्ष 2015 में दिल्ली राज्य एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने गोला फेंक, भाला फेंक और चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीते। इसी प्रदर्शन ने उनके एथलेटिक्स करियर को नई दिशा दी। वर्ष 2016 में फाजा ग्रां प्री में भी उन्होंने गोला फेंक और चक्का फेंक में रजत पदक हासिल किए।
डोपिंग निलंबन के कारण नहीं खेल पाए एशियन पैरा गेम्स
नीरज यादव हाल ही में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर 2023 में लिए गए उनके एक नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ स्टैनोजोलोल मिलने के बाद उनके खिलाफ डोपिंग का मामला चला और उन्हें निलंबन का सामना करना पड़ा। नीरज ने इस मामले में अपनी बेगुनाही का दावा किया था और नमूने की जांच पर सवाल उठाए थे।
नीरज यादव का खेल सफर शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने की मिसाल रहा। उनके निधन से भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने एक अनुभवी और सफल खिलाड़ी खो दिया है।


