भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर एक बार फिर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि दोनों देश ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं और इसे पूरा करने के लिए फिलहाल गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस से भारत की तेल और गैस खरीद को लेकर अमेरिका की नीति और संभावित प्रतिबंधों पर चर्चा चल रही है।
रुबियो ने साफ संकेत दिया कि विदेश नीति में किसी एक मुद्दे को अलग करके फैसला नहीं लिया जा सकता। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक बाजार और रणनीतिक साझेदारी जैसे पहलुओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। इस बीच, रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच 20 अक्टूबर को मुंबई में बातचीत होनी है। इस बैठक में व्यापार के साथ ऊर्जा, निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
रूस से तेल खरीद पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?
रुबियो ने रूस से तेल और गैस खरीदने के मामले में भारत की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ देशों के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। भौगोलिक परिस्थितियां और ऊर्जा आपूर्ति की वास्तविकताएं भी विदेश नीति के फैसलों को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई बहाना नहीं है, बल्कि सभी परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। अमेरिका ने पिछले कुछ महीनों में वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए प्रतिबंधों के मामले में कुछ छूट दी है। रुबियो के मुताबिक, भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है और उसके साथ संबंधों को ध्यान में रखना भी जरूरी है।
इस बयान को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि रूस से भारत की ऊर्जा खरीद और अमेरिकी व्यापार नीति के बीच संबंधों पर लगातार चर्चा हो रही है। हालांकि, रुबियो ने ट्रेड डील के अंतिम प्रारूप, शुल्क दरों या समझौते की घोषणा की किसी निश्चित तारीख का खुलासा नहीं किया।
जयशंकर के साथ बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रुबियो की 20 अक्टूबर को मुंबई में होने वाली बैठक भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दोनों पक्ष व्यापार समझौते की प्रगति के अलावा ऊर्जा, निवेश, रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों पर बातचीत कर सकते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर पिछले कुछ समय से बातचीत जारी है। विदेश मंत्री जयशंकर ने भी हाल में कहा था कि दोनों देश मतभेदों को दूर करने के लिए लगातार संपर्क में हैं और वार्ता किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी बातचीत की गति को तेज बताते हुए कहा था कि समझौते के कई बड़े मुद्दों पर प्रगति हुई है।
क्या जल्द हो सकता है समझौता?
रुबियो के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका और भारत दोनों समझौते को आगे बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन बातचीत के करीब पहुंचने और आधिकारिक तौर पर समझौता होने के बीच अंतर है। अंतिम सहमति के लिए शेष मुद्दों, कानूनी प्रावधानों और दोनों देशों के आर्थिक हितों पर सहमति जरूरी होगी।
भारत के लिए इस समझौते का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में कारोबार के नए अवसर मिल सकते हैं। वहीं, अमेरिका भी भारत के बड़े बाजार और रणनीतिक महत्व को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
अब सबकी निगाहें जयशंकर और रुबियो की बैठक पर टिकी हैं। देखना होगा कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कोई ठोस समयसीमा तय करते हैं या अभी बातचीत के कुछ और दौर बाकी रहेंगे। फिलहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत जरूर देता है, लेकिन अंतिम घोषणा का इंतजार करना होगा।


