उत्तर प्रदेश तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीक के क्षेत्र में अपनी भूमिका बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि प्रदेश अब केवल मोबाइल फोन का असेंबली केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि माइक्रोचिप, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उन्नत क्षेत्रों में कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने इसे मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंचने वाली विकास यात्रा बताया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का बड़ा आधार तैयार हुआ है। राज्य सरकार के अनुसार, देश में बनने वाले करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी है। इससे राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की राष्ट्रीय श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान मिला है।
जेवर में चिप यूनिट से बढ़ी उम्मीद
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में जेवर स्थित एचसीएल-फॉक्सकॉन की चिप इकाई शामिल है। करीब 3,706 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को प्रदेश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जून 2026 में जेवर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी परियोजनाओं के लिए करीब 6,750 करोड़ रुपये के निवेश की आधारशिला भी रखी गई थी।
योगी ने कहा कि प्रदेश में तकनीकी क्षेत्र से जुड़े निवेश का दायरा अब मोबाइल असेंबली से आगे बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर के साथ डेटा सेंटर और एआई से जुड़े निवेश भी डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार का आधार तैयार कर रहे हैं। राज्य में 644 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है।
स्टार्टअप और युवाओं पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने तकनीकी बदलाव को केवल औद्योगिक निवेश तक सीमित नहीं बताया। उनके मुताबिक, प्रदेश में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप और आठ यूनिकॉर्न हैं। एआई-प्रज्ञा के जरिए 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य भी रखा गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को उभरती तकनीकों के लिए तैयार करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में यह बदलाव रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार से सप्लाई चेन, कंपोनेंट निर्माण, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी कौशल से जुड़े अवसर बढ़ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, आईटी और सेमीकंडक्टर के लिए अलग-अलग नीतियां भी तैयार की हैं। राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढांचा तैयार किया जा रहा है।
योगी के अनुसार, प्रदेश की मौजूदा दिशा यह दिखाती है कि उत्तर प्रदेश तकनीक के केवल उपभोक्ता बाजार से आगे बढ़कर निर्माण और नवाचार के केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर, एआई सिटी और डेटा सेंटर क्षेत्र इस बदलाव की गति तय करने वाले प्रमुख क्षेत्र हो सकते हैं।
पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश को ‘बीमारू’ बनाए रखा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पिछली सरकारों पर प्रदेश की क्षमता का सही इस्तेमाल नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में असीम संभावनाएं थीं, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इनका उपयोग करने के बजाय प्रदेश को लंबे समय तक ‘बीमारू’ की स्थिति में बनाए रखा। उनके मुताबिक, इससे राज्य की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता का अपेक्षित विकास नहीं हो सका।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के जरिए देश को नई दिशा देने का विजन रखा। डबल इंजन सरकार ने इसी सोच को उत्तर प्रदेश में नीतियों, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में उद्योग, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में बदलाव दिखाई दे रहा है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल बड़ा उपभोक्ता बाजार बनाने का नहीं, बल्कि उत्पादन और नवाचार का प्रमुख केंद्र विकसित करने का है।


