फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई है। कॉकपिट में हमले के बावजूद विमान को सुरक्षित स्थिति में लाने और यात्रियों की जान बचाने में भूमिका निभाने वाले स्मित की दुनियाभर में तारीफ हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उनसे बात कर चुके हैं। नेतन्याहू ने तो पीएम मोदी और कैप्टन स्मित को अगले इस्राइली स्वतंत्रता दिवस समारोह में आमंत्रित भी किया है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी की कथित चुप्पी पर निशाना साधते हुए पूछा कि कैप्टन स्मित की बहादुरी पर इन नेताओं की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। इसी बीच अमेरिका के न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
बीजेपी ने बाटला हाउस और गाजा का जिक्र किया
सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान में बाटला हाउस और गाजा से जुड़े मुद्दों का संदर्भ देते हुए गांधी परिवार की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मुद्दों पर कांग्रेस नेताओं ने अतीत में सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी, वहां कैप्टन स्मित जैसे भारतीय पायलट की बहादुरी पर कथित चुप्पी अलग रवैया दिखाती है। बीजेपी ने इसे विचारधारात्मक अंतर से जोड़ते हुए कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा है।
इससे पहले बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया भी राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी की ओर से कैप्टन स्मित की बहादुरी पर सार्वजनिक बयान नहीं आने को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया हमलावर की धार्मिक पहचान से प्रभावित हो सकता है। यह बीजेपी का राजनीतिक आरोप है; कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का जवाब अलग से देखा जाना बाकी है।
कैप्टन स्मित के साथ आखिर हुआ क्या था?
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के भीतर सह-पायलट ने कैप्टन स्मित पर हमला किया था। विमान में 174 लोग सवार थे। स्मित के मुताबिक, सह-पायलट ने प्रार्थना करने की बात कही और कुछ देर बाद पीछे से उन पर हमला कर दिया। हमले में घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, जिसके बाद अन्य क्रू सदस्यों ने अंदर पहुंचकर स्थिति संभाली। विमान को बाद में सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित उतारा गया। मामले की जांच संबंधित देशों की एजेंसियां कर रही हैं।
जोहरान ममदानी पर भी उठे सवाल
दूसरी ओर जोहरान ममदानी की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। यूएई के प्रभावशाली टिप्पणीकार अमजद ताहा ने ममदानी की प्रतिक्रिया न आने को लेकर सवाल किया और उनकी सार्वजनिक प्राथमिकताओं पर टिप्पणी की। रिपोर्ट में इसे गाजा और हमास को लेकर ममदानी के पिछले रुख के संदर्भ में पेश किया गया है। हालांकि, ममदानी की ओर से कैप्टन स्मित के मामले में कोई प्रतिक्रिया न देने का कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
बहादुरी की चर्चा के बीच सियासत तेज
कैप्टन स्मित फिलहाल हमले में लगी चोटों से उबर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में बताया था कि गंभीर स्थिति के बावजूद उन्हें यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान था। नेतन्याहू ने उन्हें इस्राइल, भारत और दुनिया का हीरो बताया है और अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में उनके सम्मान की बात कही है।
ऐसे में कैप्टन स्मित की बहादुरी को लेकर देश-विदेश में सम्मान के बीच भारत में इस घटना ने राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है। बीजेपी जहां विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठा रही है, वहीं इन आरोपों पर कांग्रेस और संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार है।


