कांग्रेस ने पंजाब और उत्तर प्रदेश में प्रदेश संगठन की कमान नए चेहरों को सौंपकर बड़ा बदलाव किया है। पंजाब में पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को पार्टी की कमान मिली है। दोनों नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है। परगट सिंह ने खेल के मैदान से निकलकर सियासत में कदम रखा, वहीं आराधना मिश्रा को राजनीति पारिवारिक विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने विधानसभा और संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई।
ओलंपियन से राजनेता बने परगट सिंह
परगट सिंह की पहचान लंबे समय तक हॉकी के मैदान पर रही। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे और ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। खेल से सार्वजनिक जीवन में पहचान बनाने के बाद उन्होंने 2012 में शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और जीत हासिल की।
हालांकि उनकी राजनीतिक यात्रा अकाली दल के साथ ज्यादा लंबी नहीं रही। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस के टिकट पर भी उन्होंने जालंधर कैंट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने यह सीट बरकरार रखी। इस तरह वह जालंधर कैंट से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं।
संगठन में भी परगट सिंह को अहम जिम्मेदारियां मिलीं। 2021 में नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव (संगठन) बनाया गया था। इसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में उन्होंने खेल और शिक्षा मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। अब प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनके सामने संगठन को एकजुट रखने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
आराधना मिश्रा मोना की राजनीतिक विरासत
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ का सियासी सफर अलग तरह का है। वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। उनके पिता रामपुर खास विधानसभा सीट से 1980 से लगातार नौ बार विधायक रह चुके हैं। एक ही पार्टी और चुनाव चिह्न से लगातार जीत का यह रिकॉर्ड भी दर्ज है। रामपुर खास लंबे समय से तिवारी परिवार की राजनीतिक पहचान का प्रमुख केंद्र रहा है।
आराधना मिश्रा ने राजनीति में आने से पहले सामाजिक क्षेत्र में भी काम किया। वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य वर्ष 2000 से हैं और 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की मीडिया अभियान समिति से भी जुड़ी थीं। 2013-14 में प्रमोद तिवारी के राज्यसभा जाने के बाद रामपुर खास सीट पर हुए उपचुनाव में आराधना ने पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2017 और 2022 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। 2022 में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को 14,741 वोटों से हराया था।
विधानसभा से संगठन तक बढ़ी भूमिका
आराधना मिश्रा 2019 से उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता के तौर पर पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। महिलाओं और सामाजिक मुद्दों से जुड़े अभियानों में भी उनकी सक्रियता रही है। वह प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में काम कर चुकी हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल की है और लंबे समय तक सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी रही हैं।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। उनके साथ संगठन में इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी बनाया है। ऐसे में यूपी में नए संगठन के सामने अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संगठनात्मक पहुंच बढ़ाने और चुनावी तैयारियों को गति देने की चुनौती रहेगी।
इस तरह पंजाब में परगट सिंह का चुनाव खेल और प्रशासनिक अनुभव से निकलकर संगठन की कमान तक पहुंचने की कहानी है, जबकि यूपी में आराधना मिश्रा मोना राजनीतिक विरासत के साथ विधानसभा और संगठन में अपने लंबे अनुभव के आधार पर प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में आई हैं। दोनों नियुक्तियां कांग्रेस के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव हैं।


