कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। खरगे ने आरोप लगाया कि जिस तरह नोटबंदी से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, उसी तरह कथित ‘वोटबंदी’ से लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर योग्य नागरिक के वोट की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है।
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और उन्हें पद से हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस ने इन आरोपों के संदर्भ में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाबदेही तथा पारदर्शिता की मांग की है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बैठक में पार्टी की पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं। पहली मांग है कि मतदाता सूची में किए गए बड़े बदलावों से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए। दूसरी, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी देने के साथ अपील का अवसर दिया जाए। तीसरी मांग है कि राजनीतिक दलों को आवश्यक चुनावी डेटा समय पर और सरल प्रारूप में उपलब्ध कराया जाए। चौथी मांग के तहत गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की बात कही गई है। पांचवीं मांग चुनाव प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की है।
खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 से जुड़े नियमों में बदलाव पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित नहीं माना जाना चाहिए।
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएगी। खरगे ने कहा कि चुनाव और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान की रक्षा महत्वपूर्ण है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कई राज्यों में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।


