श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की खो-खो खिलाड़ी नाजिया बीबी ने जनवरी 2025 में भारत को पहला खो-खो विश्व कप जिताने वाली टीम का हिस्सा बनकर इतिहास रचा था। लेकिन विश्व चैंपियन बनने के करीब दो साल होने को हैं और नाजिया को राज्य सरकार की ओर से घोषित 40 हजार रुपये की इनामी राशि अब तक नहीं मिली है। 23 वर्षीय नाजिया का कहना है कि जीत के बाद सम्मान और पहचान मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पुरस्कार राशि के इंतजार ने उनकी खुशी को फीका कर दिया है।
सरकार ने किया था 40 हजार रुपये देने का एलान
जम्मू-कश्मीर सरकार ने विश्व चैंपियन टीम की सदस्य नाजिया के लिए 40 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की थी। नाजिया के मुताबिक, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह रकम उनके खाते में नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों से आने वाली उनकी कई साथी खिलाड़ियों को विश्व कप जीतने के बाद लाखों और कुछ मामलों में करोड़ों रुपये तक के पुरस्कार मिले। इसके मुकाबले जम्मू-कश्मीर से उन्हें मिलने वाली घोषित राशि काफी कम थी, लेकिन नाजिया के लिए मुद्दा रकम से ज्यादा सम्मान और वादे के पूरा होने का है।
नाजिया ने कहा कि विश्व कप जीतना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था, लेकिन पुरस्कार नहीं मिलने से अब वह उपलब्धि पहले जैसी खुशी नहीं देती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक विश्व चैंपियन खिलाड़ी को घोषित इनाम के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।
पढ़ाई और खेल के खर्च में आ रही परेशानी
नाजिया के सामने सिर्फ पुरस्कार राशि का इंतजार ही नहीं, बल्कि आगे की पढ़ाई और खेल से जुड़े खर्चों की चुनौती भी है। वह जम्मू में पोस्टग्रेजुएशन करना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत है। फिलहाल उनके खेल और अन्य खर्चों को उनके पिता संभाल रहे हैं।
नाजिया के मुताबिक खिलाड़ियों को अच्छी डाइट, खेल के जूते और बेहतर सुविधाओं की जरूरत होती है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को पहचान मिलने और उन तक मदद पहुंचने में काफी समय लग जाता है। उनके अनुसार, अगर खेल में आगे बढ़ना है तो खिलाड़ियों को नियमित सहयोग और बेहतर सुविधाएं मिलना जरूरी है।
विश्व चैंपियन बनने के बाद भी इंतजार
जनवरी 2025 में भारत ने खो-खो के पहले विश्व कप में खिताब जीता था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद इस खेल को देशभर में नई पहचान मिली और भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों की चर्चा हुई। नाजिया भी उस विजेता टीम का हिस्सा थीं। इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर की इस खिलाड़ी को अपने राज्य से घोषित पुरस्कार राशि पाने के लिए अब तक इंतजार करना पड़ रहा है।
नाजिया का मामला यह सवाल भी सामने लाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को घोषित पुरस्कार समय पर मिलना कितना जरूरी है। खासकर उन खिलाड़ियों के लिए, जिनकी आगे की पढ़ाई और प्रशिक्षण भी आर्थिक संसाधनों पर निर्भर है।


