भारत और चीन के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अहम पहलू सामने रखा है। उन्होंने कहा कि भारत का कुछ सामान वास्तव में चीन पहुंचता है, लेकिन उसका निर्यात आंकड़ों में चीन के खाते में दर्ज नहीं हो पाता। इसकी वजह यह है कि कई उत्पाद पहले वियतनाम या किसी दूसरे देश के रास्ते चीन पहुंचते हैं। ऐसे में आधिकारिक आंकड़ों में भारत का निर्यात चीन की तुलना में कम दिखाई देता है।
वियतनाम के रास्ते चीन पहुंचता है सामान
सीतारमण ने पुडुचेरी में आयोजित पोंडी लिट फेस्ट 2026 के दौरान एक संवाद में भारत-चीन व्यापार के इस पहलू को समझाया। उन्होंने कहा कि भारत के निर्यात खाते में कुछ सामान वियतनाम को भेजा हुआ दर्ज होता है, जबकि वह आगे चीन पहुंच जाता है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति खास तौर पर उन उत्पादों में देखी जाती है जिनकी चीन में बड़ी मांग है।
वित्त मंत्री ने उदाहरण के तौर पर भैंस के मांस और जेनेरिक दवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों ऐसे उत्पाद हैं जिनका भारत से बड़े पैमाने पर निर्यात हो सकता है, लेकिन चीन में सीधे बाजार पहुंच नहीं मिलने के कारण ये सामान दूसरे देशों के माध्यम से वहां पहुंचते हैं। सीतारमण ने कहा कि भारत लंबे समय से चीन के सामने बाजार पहुंच का मुद्दा उठाता रहा है।
चीन के साथ व्यापार घाटा कितना है?
भारत और चीन के बीच व्यापार में बड़ा असंतुलन लंबे समय से बना हुआ है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन को 19.47 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि चीन से 131.63 अरब डॉलर का आयात हुआ। इस तरह व्यापार घाटा 112.16 अरब डॉलर रहा।
हालांकि, सीतारमण की टिप्पणी का मतलब यह नहीं है कि पूरा व्यापार घाटा केवल तीसरे देशों के रास्ते होने वाले निर्यात की वजह से है। चीन से भारत के आयात का आकार भी काफी बड़ा है। मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, दूरसंचार उपकरणों के हिस्से, लिथियम-आयन बैटरी और उर्वरक जैसे उत्पादों में चीन भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
भारत अब घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। उन्होंने सौर ऊर्जा से जुड़े उपकरणों और दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) का उदाहरण दिया। सरकार उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए कंपनियों को देश में निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
सीतारमण के मुताबिक, भारत का लक्ष्य केवल चीन से आयात घटाना नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में घरेलू क्षमता तैयार करना तथा आयात के स्रोतों में विविधता लाना भी है। इस पूरी तस्वीर में वियतनाम के रास्ते चीन पहुंचने वाला भारतीय सामान भारत-चीन व्यापार घाटे के आंकड़ों को समझने का एक अतिरिक्त पहलू सामने लाता है।


