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मोदी सरकार का दो-तिहाई बहुमत पर जोर, टल सकता है मंत्रिमंडल विस्तार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। ताजा राजनीतिक हलचलों और सूत्रों के हवाले से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार अब संसद के आगामी मानसून सत्र तक के लिए टल सकता है। वर्तमान में सरकार का पूरा ध्यान किसी भी बड़े फेरबदल के बजाय संसद में ‘दो-तिहाई बहुमत’ का मजबूत आंकड़ा जुटाने और कूटनीतिक रणनीतियों को साधने पर केंद्रित है।

क्यों टल रहा है मंत्रिमंडल विस्तार?

केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद से ही मोदी कैबिनेट में फेरबदल और नए चेहरों को शामिल करने की चर्चा तेज थी। हालांकि, सरकार ने फिलहाल अपनी प्राथमिकताओं में थोड़ा बदलाव किया है:

  • दो-तिहाई बहुमत पर नजर: सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इस समय संसद के भीतर विधायी कार्यों और महत्वपूर्ण विधेयकों को निर्बाध रूप से पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की संख्या का प्रबंध करना है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय सांसदों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • उत्तर प्रदेश और क्षेत्रीय संतुलन: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार में आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों और अन्य राज्यों के क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को भी बारीकी से साधा जाना है। इसके लिए पार्टी आलाकमान को कुछ और समय की आवश्यकता है ताकि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पूरी तरह सटीक बैठ सके।

मानसून सत्र में बन सकती है बात

सूत्रों का कहना है कि अब यह फेरबदल सीधे मानसून सत्र के ठीक पहले या उसके दौरान ही देखने को मिल सकता है।

  • पार्टी के भीतर सांगठनिक बदलावों और सरकार के मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा का दौर अभी पूरा नहीं हुआ है।
  • जब तक संसद में रणनीतिक और संख्यात्मक लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो जाते, तब तक मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल देखने को मिलने की संभावना बेहद कम है।
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