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बाबरी विध्वंस पर रोई थीं सोनिया गांधी? भाजपा के आरोपों पर उदित राज बोले-देश के हालात को लेकर थीं भावुक

बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुरानी यादें एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई हैं। सोनिया गांधी ने हाल ही में एक साक्षात्कार में बताया था कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस देखकर वह टेलीविजन पर रो पड़ी थीं। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सवाल उठाए। अब कांग्रेस नेता उदित राज ने सोनिया गांधी का बचाव करते हुए कहा है कि वह मस्जिद के लिए नहीं, बल्कि देश के हालात और सामाजिक ताने-बाने को लेकर भावुक थीं।

उदित राज ने क्या कहा?

उदित राज ने सोनिया गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल बाबरी मस्जिद तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, मस्जिद का विध्वंस दुखद घटना थी और सोनिया गांधी की चिंता देश की सामाजिक संरचना को लेकर थी।

उदित राज ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती है। यदि इतने बड़े समुदाय को नफरत की नजर से देखा जाएगा, उसे मुख्यधारा से अलग रखा जाएगा या निशाना बनाया जाएगा, तो इसका असर देश की प्रगति पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी उस समय देश की स्थिति को लेकर भावुक थीं और देश के लिए रो रही थीं।

भाजपा ने सोनिया गांधी के बयान पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ को दिए साक्षात्कार में 1992 की घटना को याद किया था। उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस देखकर उन्हें एहसास हुआ कि भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

इस बयान पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि सोनिया गांधी की सहानुभूति राम जन्मभूमि के साथ थी या मस्जिद के साथ। भाजपा ने उनके टेलीविजन पर विध्वंस देखने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि वह किस चैनल पर घटना देख रही थीं।

रामराज्य और बाबर को लेकर भी हुई बयानबाजी

भाजपा ने सोनिया गांधी की टिप्पणी को कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा से जोड़ते हुए आलोचना की। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस महात्मा गांधी के रामराज्य के विचार से दूर हो गई है। वहीं उदित राज ने भाजपा पर पलटवार करते हुए उसकी सरकारों को ‘क्वाड्रपल इंजन’ सरकार कहा और आरोप लगाया कि भाजपा के अधिक स्थानों पर सत्ता में आने से देश को नुकसान हो रहा है।

फिर चर्चा में आया 1992 का घटनाक्रम

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस भारतीय राजनीति के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है। इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। आज भी यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। सोनिया गांधी के संस्मरण और साक्षात्कार के बाद इस घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

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