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रामायण Review: VFX की भव्यता में दबे भावनात्मक पल, रावण बनकर छाए यश, कैसी रही साई पल्लवी-रणबीर कपूर की एक्टिंग

करीब 4000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट और लंबे इंतजार के बाद निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे सितारों से सजी इस फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। फिल्म का उद्देश्य भारतीय महाकाव्य रामायण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भव्य सिनेमाई अनुभव के रूप में पेश करना है। इस मामले में फिल्म काफी हद तक सफल नजर आती है, लेकिन कहानी के भावनात्मक पक्ष पर उतनी मेहनत दिखाई नहीं देती।

फिल्म में अयोध्या, लंका, देवताओं और असुरों की दुनिया को आधुनिक वीएफएक्स तकनीक के जरिए बड़े पैमाने पर दिखाया गया है। हालांकि, कई जगह शानदार दृश्य दर्शकों को आकर्षित करते हैं, वहीं किरदारों के साथ भावनात्मक जुड़ाव की कमी खलती है। फिल्म को समीक्षकों ने 3/5 की रेटिंग दी है।

रावण के उदय से शुरू होती है कहानी

फिल्म की शुरुआत रावण यानी दशानन के जीवन और उसकी महत्वाकांक्षाओं से होती है। मां कैकसी की प्रेरणा से वह कठोर तपस्या करता है और ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करता है। इसके बाद कुबेर से लंका छीनकर तीनों लोकों पर अधिकार जमाने की कोशिश करता है। रावण के बढ़ते अत्याचारों को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु राम के रूप में अवतार लेते हैं।

कहानी आगे अयोध्या पहुंचती है, जहां राम का जन्म, सीता स्वयंवर और वनवास के प्रसंग दिखाए गए हैं। फिल्म का पहला हिस्सा राम और रावण के बीच होने वाले महायुद्ध की जमीन तैयार करता है।

यश ने रावण बनकर लूटी महफिल

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष यश का अभिनय है। रावण के रूप में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, आक्रामकता और संवाद अदायगी प्रभावित करती है। खासकर दस सिरों वाले रावण का दृश्य और सीता हरण से जुड़े प्रसंग देखने लायक हैं। उनके किरदार को फिल्म में काफी विस्तार दिया गया है।

वहीं, रणबीर कपूर राम के किरदार में शालीन और गंभीर नजर आते हैं, लेकिन कई दृश्यों में उनका अभिनय सहज नहीं लगता। वह राम की मर्यादा और सौम्यता दिखाने की कोशिश करते हैं, मगर उनके किरदार में अपेक्षित प्रभाव पूरी तरह नहीं आ पाता। सीता के रूप में साई पल्लवी का अभिनय ठीक है, लेकिन रणबीर और उनके बीच भावनात्मक केमिस्ट्री कमजोर दिखाई देती है।

अरुण गोविल और अनुपम खेर ने छोड़ी छाप

राजा दशरथ के किरदार में अरुण गोविल का अभिनय फिल्म के सबसे भावुक हिस्सों में शामिल है। उनके संवाद और चेहरे के भाव दर्शकों को किरदार से जोड़ते हैं। जटायु को आवाज देने वाले अनुपम खेर ने भी अपने वॉयस ओवर से प्रभाव छोड़ा है।

लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे का काम अपेक्षाकृत कमजोर बताया गया है। कुछ संवाद और उनका प्रस्तुतिकरण किरदार की पारंपरिक छवि से मेल नहीं खाते। वहीं, रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा के रूप में प्रभावित करती हैं।

वीएफएक्स शानदार, लेकिन संगीत और इमोशन कमजोर

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विजुअल स्केल है। लंका की भव्यता, अयोध्या की सुंदरता, देवताओं और असुरों के युद्ध तथा वन के दृश्य बड़े पर्दे पर प्रभावशाली लगते हैं। जटायु और रावण के बीच हवाई युद्ध फिल्म का प्रमुख आकर्षण है।

हालांकि, कुछ दृश्यों में ग्रीन स्क्रीन और कंप्यूटर से तैयार किए गए राक्षसों का प्रभाव साफ नजर आता है। फिल्म का संगीत भी एआर रहमान और हैंस जिमर से जुड़ी उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता। कहानी में भावनात्मक दृश्यों को पर्याप्त समय नहीं दिया गया है।

देखें या नहीं?

अगर आप बड़े पर्दे पर भव्य वीएफएक्स, शानदार एक्शन और रामायण की नई सिनेमाई प्रस्तुति देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। लेकिन अगर आप राम, सीता और लक्ष्मण के रिश्तों की गहराई और भावनात्मक जुड़ाव तलाश रहे हैं तो कुछ निराशा हो सकती है।

फिल्म का पहला भाग अपने दृश्य प्रभावों और यश के अभिनय के कारण याद रहता है, लेकिन कहानी के भावनात्मक पक्ष में सुधार की गुंजाइश छोड़ता है। अब दर्शकों की निगाहें इसके दूसरे भाग पर रहेंगी, जिसमें राम और रावण के बीच निर्णायक युद्ध देखने को मिलेगा।

फिल्म की रेटिंग: 3/5

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