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वामपंथी और नक्सल-समर्थक हैं नसीरुद्दीन शाह, पुनीत इस्सर बोले-सोच एकतरफा, सरकार पसंद नहीं तो चुनाव लड़िए

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और ‘महाभारत’ में दुर्योधन का किरदार निभाने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर के बीच राजनीतिक विचारों को लेकर जुबानी बहस चर्चा में है। पुनीत इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह के हालिया बयानों पर सवाल उठाते हुए उन पर चुनिंदा मुद्दों पर बोलने और एकतरफा विचारधारा से प्रभावित रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने शाह के विचारों को वामपंथी और नक्सल-समर्थक नजरिए वाला बताया। साथ ही कहा कि अगर किसी को मौजूदा सरकार की नीतियां पसंद नहीं हैं, तो उसे राजनीति में उतरकर चुनाव लड़ना चाहिए।

नसीरुद्दीन शाह पर क्यों नाराज हुए पुनीत इस्सर?

पुनीत इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह के अभिनय और वरिष्ठता का सम्मान करते हुए उनके राजनीतिक रुख से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि शाह उनके वरिष्ठ हैं और उनके शिक्षक भी रहे हैं। वह एक बेहतरीन कलाकार हैं, लेकिन सार्वजनिक मुद्दों पर बोलते समय उन्हें चुनिंदा रुख अपनाने से बचना चाहिए।

इस्सर के मुताबिक, भारत और दुनिया में कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर चर्चा की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शाह सभी मुद्दों पर समान रूप से अपनी राय रखते हैं या फिर उन्हीं मामलों पर प्रतिक्रिया देते हैं, जो उनकी विचारधारा से मेल खाते हैं।

उन्होंने शाह पर आरोप लगाया कि वह कई विषयों को एकतरफा, वामपंथी और नक्सल-समर्थक नजरिए से देखते हैं। हालांकि, ये पुनीत इस्सर के अपने आरोप और राजनीतिक विचार हैं।

सरकार से असहमति है तो चुनाव लड़ें: पुनीत इस्सर

पुनीत इस्सर ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार है। लेकिन उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि किसी व्यक्ति को मौजूदा सरकार पसंद नहीं है, तो वह चुनावी राजनीति में उतरकर जनता का समर्थन हासिल कर सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार मनमाने तरीके से सत्ता में नहीं आई है, बल्कि जनता ने उसे चुनाव के जरिए चुना है। इसलिए सरकार की नीतियों से असहमति रखने वाले लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से भी अपनी बात रखनी चाहिए।

इस्सर ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और कुछ अन्य विवादित मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन लोगों के रुख पर भी सवाल उठाए, जो उनके मुताबिक दोषी ठहराए गए अपराधियों और जेल में बंद आतंकियों के समर्थन में आवाज उठाते हैं।

जामिया के छात्रों के समर्थन में क्या बोले थे नसीरुद्दीन शाह?

पुनीत इस्सर की यह टिप्पणी नसीरुद्दीन शाह के उस वीडियो के बाद आई है, जिसमें उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया था। छात्र संघ की बहाली और चुनाव की समयसीमा तय करने की मांग को लेकर छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

28 अक्टूबर 2026 को सामने आए वीडियो में शाह ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए कहा कि उन्हें इस संबोधन पर गर्व है। उन्होंने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। शाह ने जामिया के साथ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान के छात्रों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया।

शाह के इन बयानों ने सरकार की आलोचना, छात्र आंदोलनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज कर दी है।

राजनीतिक विचारों को लेकर आमने-सामने अभिनेता

पुनीत इस्सर और नसीरुद्दीन शाह के बयानों से यह स्पष्ट है कि दोनों का राजनीतिक नजरिया अलग है। इस्सर ने जहां सरकार के खिलाफ असहमति जताने वालों को चुनावी रास्ता अपनाने की सलाह दी, वहीं शाह ने छात्र आंदोलनों के समर्थन और सरकार की आलोचना को अपनी अभिव्यक्ति का हिस्सा बनाया है।

फिलहाल, इस मामले में दोनों अभिनेताओं के विचारों को लेकर चर्चा जारी है। इस बहस का केंद्र केवल दो कलाकारों की असहमति नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना, नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी और सार्वजनिक हस्तियों की जिम्मेदारी को किस तरह देखा जाना चाहिए।

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