संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश पाकिस्तान को उसकी औकात और दोहरे चरित्र का करारा अहसास कराया है। संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ निराधार और भ्रामक मुद्दे उठाने पर बेहद कड़े शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि जो देश अपने यहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता, उसे भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
अल्पसंख्यकों के हनन पर पाकिस्तान की घेराबंदी
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद दयनीय है और वहां लगातार उनकी आबादी घट रही है। उनके मानवाधिकारों का हनन और उत्पीड़न आम बात हो चुकी है। जिस देश की पहचान धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और चरमपंथ से जुड़ी हो, उस शासन व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ बोलने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो राष्ट्र अपने ही नागरिकों और अल्पसंख्यकों की रक्षा में पूरी तरह विफल रहा है, उसे भारत पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
कारगिल युद्ध का जिक्र कर पाकिस्तान को आईना दिखाया
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने 1999 के कारगिल युद्ध की याद दिलाते हुए पाकिस्तान को एक बार फिर बेनकाब किया। भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बताया गया कि किस तरह युद्ध के दौरान पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना ने अपने ही सैनिकों के शवों को लेने से इनकार कर दिया था। तब भारतीय सेना ने उन पाकिस्तानी सैनिकों के शवों का पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया था। भारत ने इस ऐतिहासिक सच्चाई के जरिए पाकिस्तान की कथनी और करनी के अंतर को पूरी दुनिया के सामने उजागर किया।
आतंकवाद और आंतरिक हालातों पर कड़ा प्रहार
भारत ने पाकिस्तान के एजेंडे को खारिज करते भाविका मंगलानंदन ने कहा कि अपनी आंतरिक विफलताओं, कट्टरपंथ और आर्थिक बदहाली से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान हर बार अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग करता है। भारत ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को पालने-पोसने वाला देश जब मानवाधिकार या शांति की बात करता है, तो वह केवल हास्यास्पद लगता है। भारत ने यह भी साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे, और पाकिस्तान के किसी भी प्रोपेगेंडा का जवाब देने के लिए भारत पूरी तरह सक्षम है।


