पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर हमलों में तेजी, सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने और रूस की तेल रिफाइनरी पर यूक्रेन के हमले का असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत कारोबार के दौरान 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। बाद में यह 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो मई के बाद का उच्चतम स्तर है।
होर्मुज में तनाव से आपूर्ति पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी से दुनिया के बाजारों तक पहुंचने वाले तेल के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। ऐसे में यहां जहाजों पर हमले बढ़ने से तेल की ढुलाई, बीमा और परिवहन लागत पर दबाव पड़ता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दिनों इस क्षेत्र में हमलों की तीव्रता बढ़ी है। इससे खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहराई है। यदि जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता घट सकती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
सऊदी अरब के तेल ठिकाने भी निशाने पर
संकट के बीच सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने चिंता और बढ़ा दी है। समाचार एजेंसियों के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में तेल कंपनी सऊदी अरामको के प्रतिष्ठान को निशाना बनाने का दावा किया। धहरान स्थित अरामको मुख्यालय पर मिसाइल हमले की खबर भी सामने आई। इसके अलावा, लाल सागर के तट पर स्थित यानबू की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने रोकने की जानकारी दी। शुरुआती रिपोर्टों में यानबू के बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं होने की बात कही गई।
सऊदी अरब के लिए यानबू का बंदरगाह खास महत्व रखता है, क्योंकि यहां से तेल का निर्यात होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना भी किया जा सकता है। हालांकि, इस वैकल्पिक मार्ग की क्षमता और सुरक्षा भी सीमित हैं। ऐसे में ऊर्जा प्रतिष्ठानों या निर्यात मार्गों पर लगातार हमले वैश्विक आपूर्ति के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं।
ब्रेंट के साथ अमेरिकी कच्चे तेल में भी तेजी
तेल बाजार में तेजी केवल ब्रेंट तक सीमित नहीं रही। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी शुक्रवार को 3.5 प्रतिशत बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इस सप्ताह ब्रेंट में 4.9 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई में 10.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
रूस की रिफाइनरी पर हमले ने बढ़ाई चिंता
तेल बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक अन्य घटनाक्रम रूस में सामने आया। यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद रूस की रियाजान तेल रिफाइनरी की एक प्रमुख क्रूड डिस्टिलेशन इकाई का संचालन रोकना पड़ा। इससे रूस की ओर से डीजल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी जोखिम और रूस से ईंधन की संभावित कमी ने कारोबारियों की चिंताएं बढ़ाईं।
आपूर्ति बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने आपात भंडार से अतिरिक्त ईंधन बाजार में जारी करने की योजना पर भी काम किया है। हालांकि, बाजार में राहत कितनी मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष और समुद्री मार्गों में बाधाएं कितने समय तक जारी रहती हैं।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के तेल आयात का बिल बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन लागत और उद्योगों के खर्च पर पड़ने की आशंका रहती है।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मतलब यह नहीं है कि घरेलू पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। खुदरा कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं। फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और रूस से होने वाली ईंधन आपूर्ति पर टिकी है।


