कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राहुल गांधी को पुलिस द्वारा कथित तौर पर बलपूर्वक हटाए जाने की तस्वीरों पर नाराजगी जताते हुए सरकार के रवैये को ‘शर्मनाक’ बताया। थरूर ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और मौजूदा घटनाक्रम को लेकर उन्होंने राहुल गांधी के साथ एकजुटता जताई है।
जर्मनी में होने के कारण प्रदर्शन में नहीं हुए शामिल
शशि थरूर मंगलवार को दिल्ली में हुए इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं हो सके। वह एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बर्लिन में थे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी के प्रति समर्थन जताया। थरूर ने कहा कि वह दूर रहते हुए भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राहुल और पार्टी के साथ खड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि अंततः न्याय होगा।
राहुल समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया
इंडिया गठबंधन के सांसद मंगलवार को संसद परिसर से निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्षी दलों का यह प्रदर्शन विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर था। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कई नेता धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस तथा विपक्ष के कई नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में भी धरना दिया। करीब आठ घंटे से अधिक समय तक चले धरने के बाद पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य नेताओं को बलपूर्वक वहां से हटाकर हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, कुल करीब 260 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे। बाद में राहुल गांधी और अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया।
थरूर ने उठाया लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा
थरूर ने राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने को लेकर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वह राहुल गांधी को कथित तौर पर घसीटकर ले जाने की तस्वीरें देखकर स्तब्ध हैं। उनके मुताबिक, जिस मुद्दे को लेकर विपक्ष प्रदर्शन कर रहा था, वह मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा है। थरूर ने सरकार की प्रतिक्रिया को ‘शर्मनाक’ बताते हुए विरोध के अधिकार की बात कही।
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि मार्च के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और प्रदर्शनकारियों के बार-बार निर्देशों का पालन नहीं करने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि मंगलवार को शाम चार बजे तक किसी राजनीतिक दल ने मुलाकात के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। राहुल गांधी की हिरासत और उस पर थरूर की प्रतिक्रिया ने एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


