पहली बार 14,500 फीट की ऊंचाई पर लगा जाम, फंसे पर्यटक; वाहनों की बढ़ती संख्या बनी वजह
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर इस बार एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने प्रशासन और पर्यटकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। समुद्र तल से करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार वाहनों की लंबी कतार और जाम की स्थिति सामने आई। ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र में अचानक बढ़ी वाहनों की संख्या के कारण कई पर्यटक रास्ते में फंस गए और उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि आदि कैलाश और आसपास के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। इसी वजह से यात्रा मार्ग पर निजी वाहनों और अन्य वाहनों की संख्या भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। सीमित चौड़ाई वाले पहाड़ी रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ।
14,500 फीट की ऊंचाई पर जाम लगना सामान्य मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। यहां ऑक्सीजन का स्तर कम होने के साथ ही मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में लंबे समय तक वाहनों में फंसे रहना पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले यात्रियों के लिए ऊंचाई पर इंतजार करना जोखिम बढ़ा सकता है।
आदि कैलाश क्षेत्र में सड़कें कई जगह बेहद संकरी हैं और पहाड़ी भूगोल के कारण वाहनों को निकालने के लिए सीमित जगह उपलब्ध रहती है। एक साथ बड़ी संख्या में वाहन पहुंचने पर यातायात व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है। मौजूदा घटनाक्रम ने इस क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन के साथ यातायात प्रबंधन की चुनौती को भी सामने ला दिया है।
पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए पर्यटकों की बढ़ती संख्या जहां सकारात्मक संकेत है, वहीं इतनी ऊंचाई पर बुनियादी सुविधाओं और यातायात व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी होता जा रहा है। वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ पार्किंग, ट्रैफिक नियंत्रण, आपातकालीन सहायता और यात्रियों की सुरक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो गए हैं।
आदि कैलाश यात्रा के प्रति बढ़ते आकर्षण को देखते हुए आने वाले समय में यहां वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने और भीड़ प्रबंधन की जरूरत और बढ़ सकती है। 14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार सामने आया यह जाम इस बात का संकेत है कि आदि कैलाश में बढ़ते पर्यटन के साथ व्यवस्थाओं को भी उसी अनुपात में मजबूत करना होगा।


