उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। करीब तीन साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय राय की जगह प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई है। उनके साथ इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष, देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस नई टीम में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
अजय राय को हटाना क्यों आसान नहीं था?
अजय राय अगस्त 2023 से यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष थे। वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने और पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक पकड़ के कारण पार्टी के भीतर उनका प्रभाव रहा है। वह भूमिहार समाज से आते हैं। ऐसे में चुनाव से कुछ समय पहले उन्हें हटाने को लेकर पार्टी में हिचक की चर्चा थी। एक समय यह विकल्प भी सामने आया था कि राय को अध्यक्ष बनाए रखते हुए दो-तीन कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाएं।
हालांकि, गठबंधन की राजनीति और संगठनात्मक रणनीति ने अंततः बदलाव की राह बनाई। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की रिपोर्ट भी अजय राय को हटाने के फैसले का आधार बनी। राय को आगे केंद्र में कोई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना की भी चर्चा है।
सपा के साथ तालमेल भी अहम मुद्दा
अजय राय के कार्यकाल में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर कई मौकों पर मतभेद सामने आए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, राय गठबंधन के मुद्दे पर अपेक्षाकृत सख्त रुख रखते थे। लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर भी दोनों दलों के बीच खींचतान हुई थी। बाद में राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए गठबंधन में एकजुटता का संदेश दिया था।
आराधना मिश्रा की नियुक्ति को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। उनके और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक संवाद को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, सीट बंटवारे का अंतिम स्वरूप आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। कांग्रेस के सामने 2027 से पहले संगठन और गठबंधन—दोनों मोर्चों पर तालमेल बैठाने की चुनौती है।
नई टीम में सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश
आराधना मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आती हैं और तीन बार रामपुर खास से विधायक रह चुकी हैं। वहीं सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, जो मुस्लिम समुदाय से आते हैं। देवेंद्र निषाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है, जबकि आलोक प्रसाद को भी इसी पद पर नियुक्त किया गया है। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम दलित समाज से आते हैं। इस तरह नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम, ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व का संयोजन दिखाई देता है।
कांग्रेस के इस बदलाव को 2027 के चुनाव से पहले संगठन को व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के लिए अब इस नए संगठन को जमीन पर सक्रिय करना, कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी से जोड़ना और सपा के साथ सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर सहमति बनाना प्रमुख कार्य होंगे।
अजय राय के कार्यकाल में पार्टी ने पूर्वांचल में अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश की थी। अब नई टीम के सामने उस संगठनात्मक आधार को बनाए रखते हुए राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की चुनौती है।


