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    Robot vs Human: 4 पैरों वाले रोबोट का कमाल, 4 घंटे 19 मिनट और 52 सेकंड में रचा ये इतिहास?

    रोबोटिक्स की दुनिया में एक चार पैरों वाले रोबोट ने ऐसा कारनामा किया है, जिसने इंसानों के साथ उसकी तुलना को चर्चा में ला दिया है। दक्षिण कोरिया के KAIST के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित रोबोट RAIBO2 ने 42.195 किलोमीटर की पूरी मैराथन केवल एक बार बैटरी चार्ज करके पूरी कर ली। रोबोट ने यह दूरी 4 घंटे 19 मिनट 52 सेकंड में तय की। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ऊर्जा दक्षता के एक मानक में RAIBO2 ने मानव धावक के बेंचमार्क को भी पार किया है।

    एक चार्ज में 42.195 किलोमीटर

    RAIBO2 ने दक्षिण कोरिया की Sangju Marathon में आधिकारिक मैराथन पूरी की थी। यह उपलब्धि नवंबर 2024 में हासिल की गई थी, लेकिन इससे जुड़ा विस्तृत शोध 23 सितंबर 2026 को Nature में प्रकाशित हुआ है। रोबोट ने मैराथन के दौरान औसतन 2.64 मीटर प्रति सेकंड की गति बनाए रखी। रास्ते में ऊंचाई में कुल करीब 286 मीटर का बदलाव और फिसलन वाले हिस्से भी थे।

    रोबोट ने पूरी दौड़ के दौरान करीब 1,280 वॉट-घंटे ऊर्जा खर्च की। इसकी बैटरी की कुल क्षमता 2,016 वॉट-घंटे बताई गई है। शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, दौड़ पूरी होने के बाद भी इसमें लगभग 25 किलोमीटर तक चलने की क्षमता बची हुई थी।

    ऊर्जा दक्षता में इंसानों से कैसे आगे?

    यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। RAIBO2 ने इंसानों को दौड़ के समय में पीछे नहीं छोड़ा। इंसान इससे काफी तेज मैराथन पूरी कर सकते हैं। तुलना Total Cost of Transport यानी शरीर या मशीन के वजन के हिसाब से एक निश्चित दूरी तय करने में खर्च होने वाली ऊर्जा से की गई है।

    शोध में RAIBO2 का यह मानक 0.25 रहा, जबकि अध्ययन में मानव के लिए 0.37 का बेंचमार्क दिया गया। यानी शोधकर्ताओं के अनुसार, वजन और तय दूरी के हिसाब से रोबोट ने अपेक्षाकृत कम ऊर्जा खर्च की।

    रोबोट को इतना कुशल कैसे बनाया?

    RAIBO2 को तैयार करते समय शोधकर्ताओं ने केवल सॉफ्टवेयर पर ही काम नहीं किया। रोबोट के हार्डवेयर और उसके चलने के तरीके दोनों में बदलाव किए गए। इसमें हल्के और ऊर्जा-कुशल मैकेनिकल हिस्सों के साथ कम प्रतिरोध वाले मोटर ड्राइविंग सर्किट का इस्तेमाल किया गया।

    इसके अलावा, मशीन लर्निंग आधारित लोकोमोशन पॉलिसी की मदद से रोबोट के चलने के तरीके को इस तरह विकसित किया गया कि अनावश्यक ऊर्जा नुकसान कम हो। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग स्तर पर होने वाले ऊर्जा नुकसान का विश्लेषण करके पूरे सिस्टम को एक साथ ऑप्टिमाइज किया।

    मौजूदा रोबोट से तीन गुना ज्यादा रेंज

    इस उपलब्धि का महत्व सिर्फ मैराथन पूरी करने तक सीमित नहीं है। Nature के अध्ययन के मुताबिक, RAIBO2 एक बैटरी चार्ज पर मौजूदा क्वाड्रपेड रोबोटों की तुलना में तीन गुना से ज्यादा दूरी तय कर सकता है। आमतौर पर चार पैरों वाले रोबोटों के सामने बड़ी समस्या बैटरी खत्म होने से पहले सीमित दूरी तय कर पाना रही है।

    रेस्क्यू और पेट्रोलिंग में हो सकता है इस्तेमाल

    शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसी ऊर्जा दक्षता वाले रोबोट भविष्य में लंबी दूरी वाले कामों में उपयोगी हो सकते हैं। खास तौर पर पहाड़ी इलाकों, आपदा प्रभावित क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर जहां इंसानों के लिए पहुंचना मुश्किल हो, क्वाड्रपेड रोबोट इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

    RAIBO2 के जरिए शोधकर्ताओं ने डिलीवरी, पेट्रोलिंग और कठिन इलाकों में लंबे समय तक काम करने वाले रोबोटों की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रदर्शन किया है। हालांकि, वास्तविक दुनिया में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले स्वायत्त नेविगेशन, सुरक्षा और विश्वसनीयता जैसी चुनौतियों पर अभी और काम करना होगा।

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