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    अनंत चतुर्दशी: गणेश विसर्जन का क्या है शुभ मुहूर्त? जानें संपूर्ण विधि और कैसे करें बप्पा को विदा

    गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ गणेशोत्सव अब अपने समापन की ओर है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होगा और भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद गणपति बप्पा को विदाई देंगे।

    ध्यान देने वाली बात यह है कि चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात करीब 11:18 बजे शुरू होकर 25 सितंबर की रात करीब 11:06 बजे तक रहेगी। अलग-अलग शहरों में पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

    गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

    गणेश विसर्जन के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय का चयन करना उचित माना जाता है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को सुबह 7:41 से 9:11 बजे तक लाभ, सुबह 9:11 से 10:42 बजे तक अमृत और दोपहर 12:12 से 1:43 बजे तक शुभ चौघड़िया रहेगा। शाम को 4:44 से 6:14 बजे तक चर चौघड़िया भी उपलब्ध रहेगा।

    मुंबई जैसे शहरों में समय अलग हो सकता है। इसलिए विसर्जन के लिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना जरूरी है। उदाहरण के लिए मुंबई के लिए 25 सितंबर को अलग चौघड़िया समय निर्धारित है।

    विसर्जन से पहले करें अंतिम पूजा

    गणेश विसर्जन से पहले घर या पूजा स्थल पर भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करके गणपति के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, मोदक और अन्य नैवेद्य अर्पित करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणेश जी की आरती करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

    इसके बाद गणपति की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं। इस दौरान भक्त ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ जैसे जयकारे लगाते हुए बप्पा को विदाई देते हैं।

    इस तरह करें गणेश विसर्जन

    विसर्जन के लिए प्रतिमा को साफ पानी वाले निर्धारित स्थान पर ले जाना चाहिए। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाब या निर्धारित विसर्जन स्थल का इस्तेमाल करना बेहतर है। प्रतिमा को पानी में धीरे-धीरे विसर्जित करें। विसर्जन के बाद पूजा सामग्री को इधर-उधर न फेंकें और स्थानीय व्यवस्था के अनुसार उसका निपटान करें।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश विसर्जन भगवान गणेश के अपने धाम लौटने का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनसे अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं।

    क्या अनंत चतुर्दशी पर ही विसर्जन जरूरी है?

    दस दिन तक गणपति की स्थापना करने वाले भक्तों के लिए मुख्य विसर्जन 25 सितंबर को होगा। हालांकि कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें या सातवें दिन भी गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। 2026 में इन परंपराओं के अनुसार क्रमशः 15, 16, 18 और 20 सितंबर को भी विसर्जन किया गया।

    इसलिए विसर्जन की तिथि परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तय की जा सकती है। अनंत चतुर्दशी पर मुख्य गणेश विसर्जन के साथ भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत व्रत भी किया जाता है।

    नोट: शुभ मुहूर्त शहर और स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने स्थान के पंचांग से समय की पुष्टि करके ही विसर्जन का कार्यक्रम तय करें।

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