संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने अंतिम उच्चस्तरीय संबोधन के दौरान सुरक्षा परिषद में सुधार की जोरदार पैरवी की। उन्होंने कहा कि दुनिया बदल चुकी है और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को भी आज की वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना जरूरी है। गुतारेस का यह रुख सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप है।
अफ्रीका को स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं होना बताया अनुचित
गुतारेस ने सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर सवाल उठाते हुए विशेष रूप से अफ्रीका का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की सुरक्षा परिषद में अफ्रीका का कोई स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं होना अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य है। उनके मुताबिक, जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब दुनिया की राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन आज वैश्विक शक्ति संतुलन काफी बदल चुका है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार इसलिए जरूरी है ताकि यह आज की दुनिया का बेहतर प्रतिनिधित्व कर सके और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपट सके। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, गुतारेस ने वैश्विक संस्थाओं को बदलती शक्ति संरचना के अनुरूप ढालने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत लंबे समय से कर रहा है स्थायी सीट की मांग
भारत सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करने वाले देशों में प्रमुख रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि 1945 में बनी 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में आज की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। भारत स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता बढ़ाने की वकालत करता रहा है।
सुरक्षा परिषद में फिलहाल पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—हैं। इन देशों के पास वीटो का अधिकार है। परिषद में इनके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव के लिए लंबे समय से बहस चल रही है, लेकिन स्थायी सदस्यों के हितों और सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण सुधार की प्रक्रिया जटिल बनी हुई है।
गुतारेस ने बहुध्रुवीय दुनिया का भी किया जिक्र
गुतारेस ने अपने भाषण में कहा कि दुनिया स्पष्ट रूप से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उनके अनुसार आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी प्रभाव के नए केंद्र उभर रहे हैं, ऐसे में वैश्विक संस्थाओं को पुराने शक्ति संतुलन के आधार पर नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते संघर्षों, असमानताओं, जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी चुनौतियों का दबाव है।
गुतारेस का मौजूदा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। महासभा में उनका यह संबोधन संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में उनके अंतिम उच्चस्तरीय भाषणों में से एक रहा। उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।


