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30 जहाज होर्मुज पार, 26 कतार में, आधे से ज्यादा जहाजों में LPG और PNG

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण पैदा हुए गंभीर वैश्विक संकट के बीच, भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी और बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। शिपिंग मिनिस्ट्री (जहाजरानी मंत्रालय) के सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस सैन्य संकट के बाद से अब तक भारत आने वाले 30 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं। हालांकि, अभी भी 26 अन्य जहाज इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने के इंतजार में कतार में खड़े हैं।

आधे से ज्यादा जहाजों में एलपीजी और एलएनजी

इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से सुरक्षित निकले 30 जहाजों का विश्लेषण करें, तो इनमें से आधे से अधिक देश की रसोई और गैस जरूरतों से जुड़े थे:

  • 15 जहाज: लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लेकर रवाना हुए हैं।
  • 7 जहाज: कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के बड़े टैंकर हैं।
  • 8 जहाज: अन्य बल्क कार्गो (थोक माल) लेकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं या पहुंच चुके हैं।

इनमें से 17 जहाजों पर विदेशी झंडे (फॉरेन-फ्लैग्ड) लगे हुए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 5 जहाज मार्शल आइलैंड्स के हैं।

यूएस-ईरान शांति समझौते (MoU) से मिली रफ्तार

अधिकारियों के मुताबिक, 1 मार्च से 17 जून के बीच इस बेहद खतरनाक वॉर जोन से केवल 19 जहाजों का ही ट्रांजिट हो पाया था। लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच हाल ही में हुए एक शांति समझौते (MoU) के बाद परिस्थितियों में तेजी से सुधार हुआ। इस कूटनीतिक समझौते के बाद बेहद कम समय में 11 जहाजों ने सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है, जिससे भारत की लड़खड़ाती सप्लाई चेन को बड़ी संजीवनी मिली है।

उदाहरण के तौर पर, इस समझौते के ठीक बाद पिछले 3 महीनों से समुद्र में फंसा भारत का पहला एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ गुजरात के दहेज पोर्ट पर सुरक्षित पहुंच चुका है। इसके अलावा लाखों टन कच्चा तेल लेकर आ रहे तीन बड़े भारतीय टैंकर (देश वैभव, देश विभोर और सन्मार हेराल्ड) भी सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं।

अभी भी कतार में हैं 26 जहाज

भले ही 30 जहाज सुरक्षित निकल गए हों, लेकिन खाड़ी (Persian Gulf) में अभी भी भारत के हितों से जुड़े 26 जहाज फंसे हुए हैं, जो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं:

  • 3 जहाज: ऊर्जा (तेल और गैस) से लदे हुए हैं।
  • 10 जहाज: भारत की कृषि जरूरतों के लिए बेहद जरूरी फर्टिलाइजर्स (उर्वरक) लेकर खड़े हैं।
  • 13 जहाज: अन्य आवश्यक सामग्रियों और कार्गो से लदे हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मार्ग?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील और प्रमुख एनर्जी चोकपॉइंट (जलमार्ग) है, जहां से दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) गुजरता है। भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी खाड़ी के रास्ते आता है, इसलिए इस रास्ते का खुला रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अनिवार्य है।

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