मध्य प्रदेश के देवास में थाना प्रभारी (टीआई) दिलीप पुरी की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कार्रवाई मिली है। हत्याकांड के मुख्य आरोपी का पुलिस के साथ शॉर्ट एनकाउंटर हुआ, जिसमें उसके पैर में गोली लगी है। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है। आरोपी की गिरफ्तारी और एनकाउंटर से जुड़े घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्रवाई जारी है।
अलीराजपुर से गिरफ्तार कर देवास ला रही थी पुलिस
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी गजेंद्र रावत उर्फ अक्कू (28) घटना के बाद फरार था। उसे अलीराजपुर जिले से गिरफ्तार किया गया था। एसआईटी की टीम उसे पूछताछ के लिए देवास ला रही थी। इसी दौरान राजोदा और बरोठा के बीच पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया।
पुलिसकर्मी वाहन का टायर बदल रहे थे। इसी बीच आरोपी ने लघुशंका जाने की बात कही। सुरक्षा में तैनात एएसआई उसे सड़क किनारे लेकर गए। आरोप है कि इसी दौरान गजेंद्र ने एएसआई की सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और भागने लगा। उसने पुलिस टीम पर फायरिंग भी की।
जवाबी कार्रवाई में दाहिने पैर में लगी गोली
पुलिस के अनुसार, आरोपी की फायरिंग के बाद जवानों ने उसे रुकने की चेतावनी दी। इसके बावजूद वह गोली चलाता रहा। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक गोली उसके दाहिने पैर में लगी। घायल होने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया। छीनी गई सर्विस रिवॉल्वर भी बरामद कर ली गई।
शुरुआत में आरोपी को देवास जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने के कारण बाद में बेहतर उपचार के लिए उसे इंदौर रेफर कर दिया गया।
क्या था टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड?
यह मामला 2 नवंबर की सुबह का है। खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को इंदौर-बैतूल हाईवे पर अवैध शराब की तस्करी की सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने एक ट्रक को रोकने की कोशिश की। ट्रक में 1800 लीटर से अधिक अवैध शराब होने की बात सामने आई थी।
पुलिस के मुताबिक, चालक ने पकड़े जाने से बचने के लिए ट्रक को डिवाइडर पर चढ़ा दिया। इसी दौरान ट्रक का पिछला पहिया दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल टीआई ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस घटना में एक पुलिस कांस्टेबल भी घायल हुआ था।
शराब तस्करी नेटवर्क की भी जांच
इस हत्याकांड के बाद पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क की पड़ताल शुरू की। मामले में राहुल जायसवाल, विजय राव और ट्रक मालिक केराम सिंह चांगोद सहित तीन आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका था। मुख्य आरोपी गजेंद्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
दूसरी ओर, टीआई के परिजनों ने मामले में कड़ी कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग उठाई है। पुलिस की जांच में अब यह पता लगाने पर भी जोर है कि अवैध शराब की खेप कहां से लाई गई थी और गुजरात तक इसकी सप्लाई का नेटवर्क किन लोगों के जरिए संचालित हो रहा था।


