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AI से उड़ाए 300 करोड़, 150 शिकायतें आईं, छोटी कंपनियां निशाने पर, चीन का हाथ, RBI सतर्क

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब साइबर अपराधी भी तेजी से कर रहे हैं। भारत में पिछले करीब दो महीनों के दौरान छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) पर हुए साइबर हमलों में लगभग 300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का अनुमान है। इस मामले में करीब 150 शिकायतें या एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान कुछ मामलों में चीन के हैकिंग प्लेटफॉर्म CyberStrike का नाम भी सामने आया है।

छोटी वित्तीय कंपनियां क्यों बन रही हैं निशाना?

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, साइबर अपराधी मुख्य रूप से उन NBFCs को निशाना बना रहे हैं, जिनका सालाना टर्नओवर करीब 1,000 करोड़ रुपये या उससे कम है। इन कंपनियों के साइबर सुरक्षा ढांचे में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाकर धोखाधड़ी की जा रही है।

दिल्ली की एक NBFC को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी पर दो बार हमला हुआ। पहले हमले में 7.5 करोड़ रुपये और कुछ दिन बाद दूसरे हमले में 7.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

15 अक्टूबर 2026 तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास 8,502 NBFC पंजीकृत थीं। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 30, दिल्ली में 25 से अधिक और चेन्नई में 15-16 शिकायतें दर्ज हुई हैं। अन्य शहरों से भी मामले सामने आए हैं।

CyberStrike और AI टूलकिट की भूमिका

जांच एजेंसियों ने कुछ मामलों में CyberStrike नाम के हैकिंग प्लेटफॉर्म की पहचान की है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने Artex और CyberStrike जैसे टूलकिट के साथ DeepSeek, अलीबाबा के Qwen, Moonshot के Kimi और Zhipu के GLM जैसे AI मॉडल के संभावित इस्तेमाल की ओर भी ध्यान दिलाया है। हालांकि, सभी हमलों में इन टूल्स के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई है और कई मामलों की जांच जारी है।

AI की मदद से अपराधी सॉफ्टवेयर की कमजोरियां तलाशने, तकनीकी कामों को स्वचालित करने और लोगों को निशाना बनाने के लिए अधिक विश्वसनीय संदेश या फोन कॉल तैयार करने में सक्षम हो सकते हैं।

हमले से पहले 10-12 दिन तक रेकी

सूत्रों के मुताबिक, जालसाज हमला करने से पहले करीब 10 से 12 दिन तक वित्तीय कंपनी के कामकाज का अध्ययन करते हैं। वे भुगतान प्रक्रिया, अधिकृत सिस्टम आईडी और सॉफ्टवेयर की कमजोरियों की जानकारी जुटाते हैं।

इसके बाद इन खामियों का फायदा उठाकर भुगतान प्रणालियों तक अनधिकृत पहुंच बनाने और रकम दूसरे खातों में भेजने की कोशिश की जाती है। कुछ मामलों में भुगतान से जुड़े सुरक्षा नियंत्रणों को दरकिनार करने की आशंका भी सामने आई है।

RBI और साइबर एजेंसियां सतर्क

भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने वित्तीय संस्थानों को अपने सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। इसमें सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को दूर करना, भुगतान इंटरफेस की नियमित जांच, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी जैसे कदम शामिल हैं।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा भी AI से जुड़े नए साइबर जोखिमों पर चिंता जता चुके हैं। वित्तीय संस्थानों के लिए अब चुनौती केवल हमले रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सुरक्षा में एक चूक से बार-बार नुकसान न हो।

आम ग्राहकों को भी सावधान रहने की जरूरत

इन हमलों का असर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है। यदि अपराधियों के हाथ लोन लेने वालों का नाम, वित्तीय संस्था और कर्ज की रकम जैसी जानकारी लग जाती है, तो वे फर्जी कॉल या संदेश भेजकर लोगों को ठगने की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए। लोन या भुगतान से जुड़ी संदिग्ध मांग की पुष्टि हमेशा संबंधित वित्तीय संस्था के आधिकारिक माध्यम से करें।

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