प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच गुरुवार को हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय बैठक ने भारत-पोलैंड संबंधों में नया अध्याय जोड़ दिया है। टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं, जो 2010 के बाद किसी पोलिश प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा है। अगस्त 2024 में पीएम मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदला था, अब उसी साझेदारी को जमीन पर उतारने की बारी है। दौरे की शुरुआत राजघाट से हुई। पीएम मोदी से मिलने से पहले टस्क ने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उनके साथ पोलैंड के वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की और बड़ा बिजनेस डेलिगेशन भी भारत आया है, जो इस यात्रा के आर्थिक एजेंडे को साफ दिखाता है।
व्यापार: 6 अरब से 10 अरब डॉलर तक
बैठक का सबसे बड़ा फोकस व्यापार पर रहा। भारत में पोलैंड के पूर्व राजदूत एडम बुराकोव्स्की ने बताया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 6-6.5 अरब डॉलर से बढ़ाकर 10 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। इसके लिए कंपनियों के बीच सीधी साझेदारी और बिजनेस फोरम की भूमिका अहम बताई गई है।
नई दिल्ली में आयोजित भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम में इसी लक्ष्य पर मंथन हो रहा है। पोलिश कंपनियां भारत को यूरोपीय बाजार के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर देख रही हैं, जबकि भारतीय कंपनियां पोलैंड के रास्ते EU में एंट्री चाहती हैं। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अगर जल्द पूरा होता है, तो यह 10 अरब डॉलर का लक्ष्य आसानी से हासिल हो सकता है।
रक्षा और अंतरिक्ष: नई रणनीति का केंद्र
सिर्फ व्यापार ही नहीं, रक्षा और अंतरिक्ष इस यात्रा के दो सबसे अहम स्तंभ हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी टस्क से अलग मुलाकात कर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
सूत्रों के मुताबिक, पोलैंड की रक्षा कंपनियां भारत में संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी ट्रांसफर के प्रस्ताव लेकर आई हैं। पोलैंड नाटो का अहम सदस्य है और यूक्रेन युद्ध के बाद उसने अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की है। भारत के लिए यह ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात दोनों के लिए मौका है। पीएम मोदी ने पोलिश कंपनियों को रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में भारत के साथ मिलकर विकास और उत्पादन करने का खुला न्योता दिया है।
अंतरिक्ष में भी दोनों देश सहयोग तलाश रहे हैं। टस्क अपनी यात्रा के दूसरे चरण में 23 अक्टूबर को बेंगलुरु जाएंगे, जहां वे ISRO और भारतीय IT कंपनियों के प्रमुखों से मिलेंगे। AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल तकनीक पर भी 2024-28 की संयुक्त कार्य योजना के तहत काम आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।
भारत की बड़ी रणनीति क्या है?
भारत की रणनीति को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है। पहला – यूरोप में पैर जमाना। पोलैंड मध्य-यूरोप की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और भारत के लिए EU में प्रवेश द्वार बन सकता है।
दूसरा – रक्षा सप्लाई चेन को विविध बनाना। रूस-यूक्रेन संकट के बाद भारत रक्षा खरीद में विविधता ला रहा है, पोलैंड इसमें नया साझेदार बन सकता है।
तीसरा – वैश्विक मुद्दों पर साथ आना। दोनों प्रधानमंत्रियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, खासकर यूक्रेन संघर्ष और इंडो-पैसिफिक पर भी विचार साझा किए।
विदेश मंत्रालय का मानना है कि टस्क की यह यात्रा भारत-पोलैंड के लंबे ऐतिहासिक रिश्तों को नई ऊर्जा देगी और रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाएगी।


