यूरोप के कई देशों में इन दिनों जनाक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। फ्रांस से लेकर अल्बानिया तक विरोध प्रदर्शनों ने सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं छात्र खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कहीं लोग महंगाई, बढ़ते किराये और सरकारी सेवाओं में गिरावट से नाराज हैं। फ्रांस, इटली और अल्बानिया में प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और गिरफ्तारियों की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, स्पेन और पुर्तगाल में महंगे मकानों और किराये के विरोध में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के पीछे अलग-अलग स्थानीय मुद्दे हैं, लेकिन युवाओं में भविष्य को लेकर अनिश्चितता और आर्थिक दबाव एक साझा कारण बनकर उभरे हैं।
फ्रांस में स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत स्कूलों की बदहाल स्थिति और संसाधनों की कमी के खिलाफ छात्रों के आंदोलन से हुई। छात्रों का आरोप है कि विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी है तथा इमारतों की स्थिति भी ठीक नहीं है। शुरुआत में सीमित रहे इस आंदोलन में बाद में श्रमिक संघों और अन्य संगठनों के लोग भी शामिल हो गए।
इसके बाद आंदोलन का दायरा बढ़ा और इसमें महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत तथा सार्वजनिक सेवाओं में कटौती जैसे मुद्दे भी जुड़ गए। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पेरिस, मार्सेई, लियोन और बोर्डो में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। लीमोज शहर में ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने से इमारत को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सप्ताहांत की अशांति के दौरान फ्रांस में करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। हालांकि, बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्ण तरीके से भी प्रदर्शन कर रहे हैं।
स्पेन में मकान और किराये का संकट
स्पेन में आवास संकट लोगों के गुस्से की बड़ी वजह बन गया है। बड़े शहरों में मकानों की कीमतें और किराये आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। खासकर युवाओं और कम आय वाले परिवारों के लिए घर लेना मुश्किल हो गया है।
मैड्रिड में शिक्षकों ने बेहतर वेतन और कामकाज की परिस्थितियों की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। आवास सुधारों को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहराया है। संसद में प्रस्तावित उपायों को पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने नवंबर में समय से पहले चुनाव कराने की घोषणा की है।
पुर्तगाल में भी महंगे घरों के खिलाफ प्रदर्शन
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन और दूसरे शहरों में लोग बढ़ते किराये और मकानों की कीमतों के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने तंबू लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि आवास की बढ़ती लागत के कारण सामान्य आय वाले लोगों के लिए शहरों में रहना कठिन होता जा रहा है।
इटली में महंगाई और सरकारी सेवाएं मुद्दा
इटली में बढ़ती महंगाई, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था और सरकारी खर्च से जुड़े मुद्दों ने भी आंदोलन को व्यापक बनाया है। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिससे कानून-व्यवस्था की चुनौती बढ़ गई है।
अल्बानिया में भ्रष्टाचार के आरोपों से नाराजगी
अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री एडी रामा की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हुए हैं। छात्र बेहतर विश्वविद्यालय सुविधाओं और सरकार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों तथा एक विवादित लक्जरी पर्यटन परियोजना को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के दौरान पत्थरबाजी, पेट्रोल बम और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं।
आखिर क्यों बढ़ रहा है यूरोप में गुस्सा?
यूरोप में विरोध प्रदर्शनों के पीछे केवल एक कारण नहीं है। महंगाई से घरेलू बजट पर दबाव, युवाओं के लिए सीमित अवसर, महंगे मकान, शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं और सरकारी सेवाओं में गिरावट ने असंतोष को बढ़ाया है। कई देशों में लोगों को लगता है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
इस जनाक्रोश के बीच राजनीतिक दल भी अपने-अपने तरीके से मुद्दों को उठा रहे हैं। कुछ नेता विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, हिंसा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच अंतर करना जरूरी है। मौजूदा हालात यूरोपीय सरकारों के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं: लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना और साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना।


