उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने मुस्लिम समाज के राजनीतिक नेतृत्व और भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अब समुदाय के युवा दूसरों के लिए दरी बिछाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि खुद नेता, विधायक और सांसद बनेंगे।
ओवैसी ने कहा, “अब हम किसी नेहरू, गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएंगे। हमारी सफों में नौजवान बेटे और बेटियां खड़े होंगे।” उनके इस बयान को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के पारंपरिक नेतृत्व पर राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है।
‘अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, नेता बनेगा’
जनसभा में ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम युवाओं में भी दूसरे समुदायों के युवाओं की तरह काबिलियत और प्रतिभा है, लेकिन उन्हें पर्याप्त राजनीतिक मंच नहीं मिलता। उन्होंने दावा किया कि AIMIM ऐसे युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर देना चाहती है।
उन्होंने कहा कि अब्दुल केवल राजनीतिक सभाओं में दरी बिछाने और दूसरे नेताओं के लिए व्यवस्था करने तक सीमित नहीं रहेगा। वह खुद नेतृत्व करेगा और विधायक तथा सांसद बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि उनका उद्देश्य केवल खुद नेता बनना नहीं, बल्कि नए नेताओं को तैयार करना है। उन्होंने लोगों से राजनीतिक रूप से जागरूक होने और अपने अधिकारों के लिए आगे आने की अपील की।
अखिलेश यादव और सपा पर साधा निशाना
AIMIM प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज लंबे समय से दूसरी पार्टियों का समर्थन करता रहा है, लेकिन उसे उसके अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अवसर नहीं मिले।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब मुस्लिम युवाओं के खिलाफ कार्रवाई होती है या वे जेल जाते हैं, तब राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी होती है। उन्होंने सपा नेतृत्व से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपने राजनीतिक हितों और नेतृत्व के बारे में खुद निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल राजनीतिक नारों तक सीमित न रहें, बल्कि मतदान के दौरान अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और एकजुट होकर राजनीतिक शक्ति बढ़ाने पर भी जोर दिया।
भाजपा और आरएसएस पर भी हमला
अपने भाषण में ओवैसी ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर वर्गों के अधिकारों और न्याय के सवालों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने दलितों और आदिवासियों समेत वंचित तबकों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया।
2027 के चुनाव पर नजर
ओवैसी ने दावा किया कि AIMIM उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी है और रामपुर में भी पार्टी अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी विभिन्न समुदायों के लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है।
रामपुर की इस जनसभा के जरिए ओवैसी ने मुस्लिम समाज के स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और चुनावी भागीदारी को अपने भाषण का प्रमुख मुद्दा बनाया। अब देखना होगा कि उनके इस संदेश का उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति और सपा-कांग्रेस के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।


