संघ प्रमुख मोहन भागवत की चीफ इमाम से मुलाकात पर क्यों नाखुश हुई मायावती ? क्या डरा रहा है वोट बैंक छूट जाने का खतरा ?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बीते दिन 22 सितंबर को एक मस्जिद और मदरसे का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ऑल इडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख उमर अहमद इलियासी से मुलाकात की। मुस्लिम धर्म गुरु से संघ प्रमुख की हुई इस मुलाकात से सियासी पार्टियों में हलचल देखी जा रही है। इस मुलाकात के बाद इमाम संगठन के प्रमुख इलियासी ने मोहन भागवत को राष्ट्र पिता और राष्ट्र ऋषि के दर्जे से भी नवाजा। ऐसे में अब उन सियासी दलो की चिंताएं बढ़ गई हैं जिनके पास मजबूत मुस्लिम वोट बैंक हुआ करता है।

उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने भी ट्वीट करते हुए इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने इस मुलाकात पर योगी सरकार को घेरते हुए कई बड़े सवाल दागे हैं।

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा कल दिल्ली स्थित मस्जिद और मदरसे में जाकर उलेमाओं से मुलाकात करने और फिर उनसे अपने आपको ’राष्ट्रपिता’ व ’राष्ट्र ऋषि’ कहलवाने के बाद क्या बीजेपी व इनकी सरकारों का मुस्लिम समाज व उनके मस्जिद-मदरसों के प्रति नकारात्मक रुख व बर्ताव में बदलाव आएगा?

मायावती ने यह भी कहा कि यूपी सरकार खुली जगह में कुछ मिनट की अकेले में नमाज़ पढ़ने की मजबूरी को भी सहन नहीं कर पा रही है तथा सरकारी मदरसों की उपेक्षा करते हुए निजी मदरसों में भी हस्तक्षेप पर उतारू है, किन्तु आरएसएस प्रमुख की इस बारे में गहरी चुप्पी के क्या मायने निकल रहे हैं इस पर भी वे जरूर गौर करें।

मायावती की इस प्रतिक्रिया पर सियासी पंडितो का कहना है कि संघ साल 2024 से पहले मुस्लिम मतदाताओं को भी साधने का प्रयास कर रही है। ऐसे में बसपा समेत वे तमाम पार्टियां खतरा महसूस कर रही है जिनके पास मुस्लिम वोटबैंक रिज़र्व रहता था। यही वजह है कि मायावती अब संघ प्रमुख और इमाम की मुलाकात पर नाखुश हैं।

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