जब भी कोई कंस पिता को चलकर अपमानित करता है तो….शिवपाल ने अखिलेश पर कसा तंज , यादव समाज से कर दी ये अपील

उत्तरप्रदेश में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच सियासी दिवार काफी हद तक ऊँची उठ चुकी हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि मुलायम सिंह यादव के कुनबे में एक बार फिर से साल 2017 वाला दौर लौट आया है। यह वह दौर था जब परिवार पूरी तरफ से बिखर चुका था। तब शिवपाल ने नई पार्टी बनाकर बगावत का बिगुल ठोक दिया था। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में लगा कि अब मुलायम सिंह यादव का परिवार मजबूती के साथ खड़ा हुआ है लेकिन चुनावी नतीजों के बाद तस्वीरें बदलते हुए देर न लगी और अखिलेश – शिवपाल के बीच तकरार खुलकर सामने आ गई।

शिवपाल यादव अब लगातार अखिलेश के खिलाफ मुखर हैं। आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर शिवपाल यादव ने यादव समाज के नाम एक पत्र लिखा जिसमे साफ़ तौर पर अखिलेश यादव के खिलाफ उनके तंज देखे जा सकते हैं। शिवपाल ने अपने इस पत्र में खास तौर पर अपने पिता को छल पूर्वक अपमानित करने वाले कंस का जिक्र किया है। माना जा रहा है कि मुलायम यादव को सपा अध्यक्ष के पद से हटाने वाले अखिलेश की तुलना शिवपाल यादव ने यहाँ कंस से की है।

शिवपाल यादव ने एक पत्र लिखते हुए कहा कि समाज में जब भी कोई कंस अपने पिता को छल – बल से अपमानित कर पद से हटाकर अनाधिकृत अधिपत्य स्थापित करता है , तो धर्म की रक्षा के लिए मां यशोदा के लाल ग्वालों के सखा योगेश्वर श्रीकृष्ण अवश्य अवतार लेते हैं और अपने योग माया से अत्याचारियों को दंड देकर धर्म की स्थापना करते हैं ।

शिवपाल यादव ने आगे लिखा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि ” यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।। हे पूज्य जन और श्रेष्ठ यदुवंशी वीरों निःसंदेह प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया भी ईश्वर द्वारा रचित किसी विराट नियति और विधान का परिणाम है । मेरे यदुवंशी भाइयों और बहनों आप सभी धरा पर धर्म रक्षक श्रीकृष्ण के ध्वजवाहक हैं । आप वीर और कृष्ण के विराट व्यक्तित्व की प्रतिछाया है ।

शिवपाल यादव ने कहा कि स्वाभाविक तौर पर ऐसे में धर्म की रक्षा में आपका दायित्व भी महत्वपूर्ण और शाश्वत है । इसलिए श्रेष्ठ यदुवंशी वीरों समाज में धर्म की स्थापना , शांति , सुरक्षा , सद्भाव , समरसता , समन्वय व एकता और लोक कल्याण हेतु मैं आप सभी का आह्वान करता हूं ।

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