क्रिकेट इतिहास में आज के दिन के हैं बेहद बड़े मायने,जाने क्या है खास

Liberal Sports Desk : 4 सितंबर क्रिकेट के इतिहास में बेहद ऐतिहासिक दिन के तौर पर देखा जाता हैं। 4 सितंबर के दिन क्रिकेट इतिहास में एवं घरेलू क्रिकेट में कई मायने हैं लेकिन भारतीय टीम के लिहाज से देखा जाए तो 4 सितंबर एक ऐतिहासिक दिन के रूप में भी देखा जाता है। क्योंकि 4 सितंबर 1979 के दिन ही सुनील गावस्कर ने भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच में कुछ ऐसा किया था जिसे शायद ही कोई भारतीय भूला हो। एक ऐसा मैच जिसे शायद गावस्कर ने पूरी तरह से भारतीय टीम के कब्जे में ला दिया था।

4 सितंबर को गावस्कर ने इंग्लैंड के जबड़े से लगभग छीन लिया था टेस्ट मैच

भारत और इंग्लैंड के बीच 1979 में ओवल टेस्ट मैच खेला जा रहा था। इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 305 रन बनाए थे तो वही जवाब में भारत की पहली पारी 202 रनों पर सिमट गई थी। लेकिन इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी में 334 रन बनाते हुए भारतीय टीम को चौथी पारी में 438 रनों का विशाल लक्ष्य टेस्ट मैच जीतने के लिए दिया था। किसी ने यह उम्मीद भी नहीं की होगी कि भारत इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जाएगा लेकिन सुनील गावस्कर के इरादे कुछ और ही थे।

भारतीय टीम की शुरुआत चौथी पारी में बेहद शानदार रही। सुनील गावस्कर और चेतन चौहान ने शानदार साझेदारी करते हुए पहले विकेट के लिए 213 रन जोड़ दिए थे। अब कहीं ना कहीं भारतीय टीम को जीत दिखाई देने लगी थी। इसी बीच दूसरे विकेट के लिए सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर के बीच 153 रनों की एक और साझेदारी बन गई और भारत एक समय में 2 विकेट के नुकसान पर 366 रनों तक पहुंच गया। लेकिन उसके बाद विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया और ऐसा लगने लगा कि अब भारत मैच ड्रॉ करने की ओर जाएगा। लेकिन सुनील गावस्कर ने हार नहीं मानी और क्रीज पर टिके रहकर बल्लेबाजी करते गए। इस बीच सुनील गावस्कर ने अपना दोहरा शतक भी पूरा कर लिया। एक ऐसी पारी जिसकी कल्पना शायद ही उस टेस्ट मैच में की जा रही थी क्योंकि चौथे और पांचवें दिन की पिच पूरी तरह से गेंदबाजों के मुरीद होते जा रही थी। गावस्कर दोहरा शतक लगाने के बाद 410 रन टीम इंडिया के कुल स्कोर पर 221 रन बनाकर आउट हो गए। अब भारत को केवल जीत के लिए यहां से 28 रनों की आवश्यकता थी लेकिन भारत इस टेस्ट मैच में 429 रन तक पहुंच पाया और टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया।

टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया लेकिन यह मैच भारतीय क्रिकेट इतिहास में पूरी तरह से जीवित रह गया। क्योंकि इस मैच में सुनील गावस्कर ने ऐसी पारी खेल डाली थी जिसे लंबे समय तक आज भी याद किया जाता है। ओवल का वह मैदान और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज खिलाड़ी ने अकेले डटे रहकर लड़ने की जो क्षमता दिखाई थी वह दिखाती थी कि भारतीय टीम कितनी लड़ाकू थी।

आज ही के दिन भारतीय क्रिकेट के शानदार विकेटकीपर खिलाड़ी किरण मोरे का जन्म हुआ था

4 सितंबर 1962 यह वह दिन है जब भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज किरण मोरे का जन्म दिवस भी है। किरण मोरे भारतीय क्रिकेट इतिहास के कैसे विकेटकीपर रहे हैं जिन्हें आज भी उनकी विकेटकीपरिंग के लिए जाना जाता है। 1992 में जावेद मियांदाद और किरण मोरे के बीच का वह किस्सा हर भारतीय क्रिकेट फैंस को याद होगा जब जावेद मियांदाद को किरण मोरे कुछ ना कुछ बोलते जा रहे थे और जावेद मियांदाद ने उनका अपने ही अंदाज में जवाब दिया था। किरण मोरे ने अपने समय में ऐसी बहुत सारी चीजें की जो फैंस के दिलों में आज भी जिंदा है।

दक्षिण अफ्रीका के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर लांस क्लूजनर का हुआ था आज के दिन ही जन्म

4 सितंबर 1971 दक्षिण अफ्रीका के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर में शुमार लांस क्लूजनर का जन्म हुआ था एक ऐसा ऑलराउंडर जो ऑस्ट्रेलिया के जबड़े से जीत छीन कर ले आता था। 1998 और 1999 लांस क्लूजनर का सबसे बेहतरीन समय था। जब ऑस्ट्रेलियाई टीम इस दक्षिण अफ्रीका के ऑलराउंडर से सबसे ज्यादा खौफ खाती थी। 1999 वर्ल्ड कप में इस ऑलराउंडर ने अपने बल्ले और गेंद से शानदार प्रदर्शन किया था। एक वक्त तो ऐसा भी था जब सेमीफाइनल में लांस क्लूजनर ने अकेले अपने दम पर लगभग दक्षिण अफ्रीका को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल जिता दिया था। लेकिन वह मैच टाई हो गया था और लीग मैच में ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका को हराया था इस वजह से ऑस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंच गया था। लेकिन इस खिलाड़ी ने बेहद शानदार खेल दक्षिण अफ्रीका की टीम से खेलते हुए दिखाया है।

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