17वी लोकसभा का वो दिन , संसद में क्या हुआ था ऐसा जो शायद कोई नहीं भूल सकता..!

संसद के मानसून सत्र का हाल ही में समापन हुआ वहीं सत्र के दौरान लगातार हंगामा बना रहा कई ऐसे दृश्य भी देखने को मिले जो शायद सदन में पहले कभी किसी ने नहीं देखा होगा। संसद में हुए हंगामे की गूंज इन दिनों हर जगह सुर्खियां बटोर रही है । लेकिन आपको बता दें कि लोकतंत्र के मंदिर के रूप में पूजा जाने वाली संसद में अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिल ही जाते हैं जिन के विषय में शायद किसी ने कभी कल्पना नहीं की होगी।

2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने दूसरी बार अपनी सत्ता काबिज की और इसी के साथ 17वीं लोकसभा का आगाज हुआ लेकिन यह आगाज शायद भारत लोकतंत्र के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया था। वाकया था सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह का । लेकिन संविधान की शपथ लेते वक्त हिंदुस्तान के लोकतंत्र के इतिहास में उस दिन जो कुछ लोकसभा में हुआ था वह भारत के लोकतंत्र ने पहली बार देखा था।

लोकसभा में उस दिन सांसदों का शपथ लेने का सिलसिला चालू हुआ लेकिन सब कुछ अलग था संविधान की शपथ लेते वक्त सभी दलों के नेताओं ने मानो सदन को धर्म सभाओं में तब्दील कर दिया था। लोकसभा में उस दिन जय श्री राम से लेकर अल्लाह ओ अकबर के नारों की चारों तरफ गूंजी थी हर सांसद शपथ लेने आता और अपने अपने धर्म संप्रदाय की जय जयकार लगाता।

लोकसभा में उस दिन जब हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी शपथ लेने पहुंचे तो भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने सदन में जय श्री राम के जोर-जोर से नारे लगाने शुरू कर दिए फिर क्या था इसके जवाब में असदुद्दीन ओवैसी ने भी शपथ लेने के बाद जय भीम जय मीम,तकबीर और जय हिंद के नारे लगाए। इसके बाद यह सिलसिला जारी रहा। भाजपा के नेता शपथ लेने आते तो जय श्री राम और भारत माता की जय ,वंदे मातरम के नारे लगाते तो वही टीएमसी के सांसद जय काली के नारे लगाते रहे।

टीएमसी सांसद खलीलुर्रहमान ने बिस्मिल्लाह ए रहमान कहकर शपथ लेने की शुरुआत की तो मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने शपथ लेने के बाद राधे राधे के नारे लगाए। गोरखपुर रवि किशन ने हर हर महादेव और मंत्रों के साथ शपथ ली। वहीं लोकसभा में शपथ लेने पहुंचे सपा सांसद शफीकुर्रह्मान ने कहा कि वंदे मातरम का नारा इस्लाम विरोधी है।

देशभर में सदन में सांसदों कि इस नारेबाजी को लेकर जमकर आलोचना हुई थी यह सवाल भी खड़े हुए कि क्या लोकतंत्र के मंदिर में संविधान को भूलकर अपने अपने धर्म संप्रदाय की जयकार लगाना कितना जायज है। लेकिन तब से अब तक कुछ नहीं बदला सदन में आज भी संविधान के नियमों को दरकिनार कर सांसदों का रवैया लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाता नजर आ रहा है।

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