TMC में शामिल होने के बाद ममता बनर्जी से मिली सुष्मिता देव, असम में संभाल सकती हैं बड़ी जिम्मेदारी

असम से कांग्रेस की पूर्व सांसद और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने सोमवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया । जैसा कि कयास लगाए जा रहे थे कि सुष्मिता टीएमसी के साथ अपने सियासी सफर को आगे बढ़ाएंगे ठीक वैसा ही हुआ सोमवार को ही सुष्मिता देव तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गई। कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की की मौजूदगी में सुष्मिता देव ने पार्टी की सदस्यता ली इस दौरान टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन भी मौजूद रहे।

तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव ने कहा कि मैं अभिषेक बनर्जी से मिली यह एक बहुत अच्छी चर्चा थी। पार्टी के लिए उनके पास गजब की दृष्टि और स्पष्टता है। सुष्मिता देव ने कहा कि हम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मिलने गए उनसे काफी शानदार चर्चा रही सुष्मिता ने कहा कि उनके पास पार्टी के भविष्य के लिए बहुत अच्छा विजन है मुझे उम्मीद है कि इसमें पार्टी के लिए मददगार साबित होंगी।

असम में बन सकती हैं पार्टी का चेहरा

सुष्मिता देव असम के सिलचर से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं वही उनके पिता मोहन देव की भी यहां जमीनी पकड़ एक समय काफी मजबूत हुआ करती थी । वही अब सूत्रों की माने तो तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी उन्हें असम में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी के चेहरे के रूप में जनता के सामने उतार सकती है। बता दें कि टीएमसी बंगाल के बाहर सत्ता विस्तार करने की होड़ में लगी हुई है ऐसे में सुष्मिता देव को असम में पार्टी के चहरे के रूप में उतार कर टीएमसी आने वाले विधानसभा चुनावों में ताकत झोंक सकती।

किसी के आने – जाने से कांग्रेस को नही पड़ता फर्क

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से जब पत्रकारों ने सुष्मिता देव के टीएमसी में शामिल होने के विषय में पूछा तो उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ली है आप ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं ।केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हम एक मजबूत पार्टी हैं किसी के आने जाने से कांग्रेस को फर्क नहीं पड़ता।

जब युवा नेता जाते हैं,बूढ़े ठहराए जाते हैं दोषी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने सुष्मिता देव के कांग्रेस से इस्तीफे को लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि जब युवा नेता चले जाते हैं तो हम बूढ़ों को (पार्टि को) मजबूती देने के प्रयासों को लेकर दोषी ठहराया जाता है। इसी के सातब कपिल सिब्बल ने अंग्रेजी का एक वाक्य लिखा जिसके जरिये व कहना चाह रहे हैं कि पार्टी सब कुछ देख कर भी अनजान बन रही है।

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