सियासत में रहकर,सियासत से दूरी,आखिर बाबुल की कैसी है ये मजबूरी…

भारतीय जनता पार्टी से आसनसोल के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने हाल ही में सियासत से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। बाबुल के इस कदम के बाद से ही राजनीतिक चौपालों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था बाबुल के राजनीति छोड़ने के पीछे वजह भी टटोली जाने लगी थी। अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से भावुकता भरे शब्दों के माध्यम से बाबुल ने राजनीति को अलविदा तो कह दिया लेकिन आलाकमान बाबुल सुप्रियो को सियासी गलियारों से यूं ही जाने नहीं देना चाहता लिहाजा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बाबुल सुप्रियो से मुलाकात की और इसके बाद बाबुल के सन्यास के निर्णय में बदलाव नजर आ रहा है।

दरअसल बीते दिन सोमवार को बाबुल सुप्रियो ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की वहीं जेपी नड्डा से मुलाकात कर बाबुल जब बाहर मीडिया से मुखातिब हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने राजनीति तो छोड़ दी है लेकिन सांसद के पद पर वह बने रहेंगे। बाबुल सुप्रियो ने कहा कि उन्होंने संवैधानिक पद की शपथ ली थी उस पद पर बने रहेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि वे किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम में नजर नहीं आएंगे इसके साथ ही वे अपनी सुरक्षा भी त्याग रहे हैं और सांसद को दिए जाने वाला आवाज भी छोड़ रहे हैं।

बाबुल सुप्रियो ने कहा कि वे सांसद पद पर तो बने रहेंगे लेकिन सियासत से दूरी बनाकर रहेंगे अब यह कैसे संभव हो पाएगा यह तो भविष्य के गर्त में छुपा हुआ है। सांसद रहते हुए कैसे बाबुल अपने आप को राजनीतिक मंचों से ,राजनीतिक कार्यक्रमों से और पार्टी से दूर रख पाएंगे यह देखने वाली बात होगी। यह भी देखना होगा कि सियासत में रहकर सियासत से दूरी बना पाने में बाबुल सफल हो पाएंगे या एक बार फिर वह सियासी मैदान में नजर आएंगे।

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