पीएम मोदी के परिवारवाद के प्रहार पर राहुल ने बोलने से किया इंकार , पवन खेड़ा ने कहा – शायद पीएम अपनी पार्टी की बात कर रहे थे

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।पीएम मोदी ने अपने भाषण मे कहा था कि भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद दो बड़ी चुनौतियां हैं जिनका देश आज सामना कर रहा है। मीडिया ने जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी से इसे लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।इतना कहकर राहुल आगे निकल गए।

जबकि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के बयान में भाजपा सरकार की जमकर आलोचना की है। सोनिया गाँधी ने कहा कि आज की आत्ममुग्ध सरकार हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के महान बलिदानों और देश की गौरवशाली उपलब्धियों को तुच्छ साबित करने पर तुली हुई है , जिसे कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है सोनिया ने यह भी कहा कि राजनैतिक लाभ के लिए ऐतिहासिक तथ्यों पर कोई भी गलतबयानी तथा गाँधी – नेहरू पटेल – आज़ाद जी जैसे महान राष्ट्रीय नेताओं को असत्यता के आधार पर कटघरे में खड़े करने के हर प्रयास का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी ।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले से कहा कि जैसा कि पीएम मोदी ने भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी के लिए अगले 25 वर्षों की रूपरेखा तैयार की. उन्होंने कहा कि भारत की दो मुख्य चुनौतियां भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद हैं। पीएम मोदी ने कहाकि “जब मैं भाई-भतीजावाद और वंशवाद की बात करता हूं, तो लोग सोचते हैं कि मैं केवल राजनीति की बात कर रहा हूं। नहीं, दुर्भाग्य से, राजनीति की इस बुराई ने हर संस्थान में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया है।

इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि उन्हें लगता है कि भाई-भतीजावाद पर पीएम मोदी की टिप्पणी उनकी पार्टी के आंतरिक मामले के बारे में थी। शायद, वह अपनी ही पार्टी के सदस्यों या उनके बेटों पर हमला कर रहे थे। पवन खेड़ा ने कहा कि लेकिन आज देश को उम्मीद थी कि मोदी जी अपने आठ साल के शासन का रिपोर्ट कार्ड और लेखा-जोखा देंगे। किसानों की आय दोगुनी करने, सबके लिए घर, हर घर में नल के पानी के बारे में किसान उनसे जवाब की उम्मीद कर रहा था। लोगों को उनसे रिपोर्ट कार्ड की उम्मीद थी। प्रधान मंत्री ने पूरे देश के साथ-साथ अपने समर्थकों को भी नीचा दिखाया है क्योंकि सभी की निगाहें लाल किले पर थीं.

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