लखनऊ में प्रियंका की साइलेंट पॉलिटिक्स ,कितना दिखेगा असर

शायद कांग्रेस की डूबती नाव को किनारे लगाने के लिए खेवनहार के रूप में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी मिल गई हैं उनका अंदाज ए बयां राजनीति दूसरों से हटकर है और यह राजनीति का अंदाज न केवल कार्यकर्ताओं को आकर्षित कर रहा है उनमें जोश भर रहा है बल्कि जनता के सामने भी संदेश जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी कभी बैकफुट पर नहीं जाएगी।

आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जो फरवरी में होने हैं लेकिन उस का आगाज शुक्रवार से ही कर दिया उनको पता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीन फैक्टर ही काम करते हैं पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिवाद के जरिए सत्ता पर कब्जा पार्टियां करती आ रही हैं उसके बाद धर्म धार्मिक आस्था को साथ लेकर पार्टियों ने विकास के सपने दिखा कर सत्ता पर अपना कब्जा जमाया लेकिन अब जब चुनाव नजदीक हैं तो सत्ता पर हमले तेज हो गए हैं ।लेकिन प्रियंका हमलावर भी हो रही हैं लेकिन उनका अंदाज गांधीवादी तरीके से ही रहा वह लखनऊ में कार्यकर्ताओं में जोश भरने पहुंची हैं 3 दिन उनका दौरा रहेगा लेकिन दौरे का आगाज जिस तरह से उन्होंने किया उसे साफ हो गया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में वे साइलेंट पॉलिटिक्स के जरिए अपना वोट बैंक बढ़ाएंगी।

शुक्रवार को अपने दौरे के दौरान लखनऊ में गांधी प्रतिमा के सामने उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन मुद्दों को सामने रख दिया जिसको लेकर बनारस के दौरे पर रहे प्रधानमंत्री मोदी एक शब्द भी न बोल सके। प्रियंका गांधी ने गांधी प्रतिमा के समक्ष से 2 घंटे तक मौन धरना दिया और उसके बाद जब पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं तो उन्होंने ऐसे मुद्दे उठा दिए जो कि देश की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चित हैं ।

प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में अपहरण हो रहा है ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में इतनी हिंसा हो रही है महिलाओं के वस्त्र खींचे गए ,तमाम जिलों में प्रशासन की ओर से धमकी दी जा रही है आखिर यह उत्तर प्रदेश में हो क्या रहा है ।उन्होंने कोरोनावायरस की लहर में स्वास्थ्य व्यवस्था जो उत्तर प्रदेश की रही उस पर भी सवाल खड़े कर दिए साफ तौर पर कहा जाए तो प्रियंका गांधी ने लोगों की पीड़ा बेबसी से अपने शब्दों के जरिए फिर से अवगत करा दिया है और धीरे-धीरे जो जख्म लोग भरने की कोशिश में जुटे हुए थे वह जख्म प्रियंका गांधी के शब्दों से फिर हरे हो रहे हैं और आक्रोश सरकार के खिलाफ फिर उभर रहा है।

इसी को तो कहते हैं साइलेंट पॉलिटिक्स प्रियंका गांधी 3 दिन के दौरे पर लखनऊ में कार्यकर्ताओं में जोश भरने गई थी जाहिर सी बात है उनका मकसद था कि अपने कार्यकर्ताओं को उत्साहित करना जिससे कि वे बूथ लेवल पर जनता को आकर्षित कर सकें लेकिन उन्होंने गांधी प्रतिमा के समक्ष जाकर यह बताने की कोशिश कर दी है कि हम गांधीवादी तरीके से हर एक उस चीज का विरोध करेंगे जो कि देश के लिए उचित नहीं है हमारा एजेंडा यही होगा जो कि संविधान के अनुरूप हो ।जो भी संविधान के खिलाफ होगा अत्याचार होगा उस पर हमारी आवाज बनी रहेगी। प्रियंका गांधी का यह तो पहला दिन था जो साइलेंट पॉलिटिक्स के जरिए रहा लेकिन आने वाले 2 दिन और भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में रंग दिखाएंगे।

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