सीमांचल की सियासत : नीतीश से नाता टूटने के बाद अमित शाह का पहला बिहार दौरा , महागठबंधन के सबसे मजबूत गढ़ में करेंगे चोट

बिहार में नीतीश कुमार का भाजपा के साथ नाता टूटने के बाद गृहमंत्री अमित शाह पहली बार बिहार के दौरे पर पहुँच रहे हैं। अमित शाह बिहार में दो दिनों तक रहेंगे जहाँ वे महागठबंधन के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले सीमांचल में एक मेगा रैली को सम्बोधित करेंगे। सीमांचल वह क्षेत्र है जहाँ 40 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी रहती है। इस क्षेत्र में महागठबंधन का दबदबा है। ऐसे में अमित शाह ने विपक्ष के सबसे मजबूत गढ़ से अपनी रैली की शुरुआत कर मिशन 2024 का आगाज करेंगे। अमित शाह की यह रैली सीधे तौर पर विपक्ष को यह सन्देश देना चाहती है कि राज्य में जेडीयू के बिना भाजपा अपनी दम पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ऐसे में विपक्ष के सबसे मजबूत दुर्ग पर निशाना साधा जा रहा है।

रंगभूमि मैदान में जमेगा रंग

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शुक्रवार दोपहर बिहार के पूर्णिया में ‘जन भावना महासभा’ नाम की एक मेगा रैली को ‘रंगभूमि मैदान’ में संबोधित करेंगे।अमित शाह 2024 के आम चुनावों के लिए टोन सेट करने के लिए आज से राज्य की दो दिवसीय यात्रा शुरू करेंगे। सीधे तौर यह लड़ाई लोकसभा की 40 सीटों के लिए होगी इसके अलावा 2023 के विधासनभा चुनाव पर भी नजर रहेगी।

बिहार में नीतीश कुमार से नाता टूटने के बाद अमित शाह की रैली से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगी। भाजपा का मिशन बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 35 पर जीत दर्ज करना है। यही वजह है कि राज्य में मिशन 24 आगाज भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह खुद कर रहे हैं।

क्या है सीमांचल का सियासी समीकरण ?

उत्तर बिहार के सीमांचल क्षेत्र में चार जिले हैं जिसमे पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और अररिया आते हैं। यहाँ मुस्लिम आबादी विधानसभा और आम चुनावों दोनों में एक राजनीतिक दल के उम्मीदवार की सफलता को प्रभावित करने के लिए बड़ी संख्या में है।इन मतदाताओं को सीधे तौर पर भाजपा विरोधी मतदाता माना जाता है। इसके अलावा ये चार जिले पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के साथ अपनी सीमा साझा करते हैं।

सीमांचल के ये चार जिले 24 विधानसभा सीटों और चार संसदीय सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अररिया की सिर्फ एक सीट जीती थी, जबकि पूर्णिया और कटिहार की दो सीटों पर जद (यू) की जीत हुई थी और किशनगंज सीट कांग्रेस पार्टी के खाते में गई थी. 2019 में, भाजपा और जद (यू) दोनों ने सहयोगी के रूप में एक साथ चुनाव लड़ा।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल 23 सितंबर को शाम 4 बजे माता गुजरी विश्वविद्यालय, किशनगंज में बिहार बीजेपी के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की बैठक को भी संबोधित करेंगे.

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