पंत और पुजारा का विकेट पड़ा महंगा, 43 साल बाद सिडनी में इतिहास रचने से चूकी टीम इंडिया

आज ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच सिडनी में तीसरा टेस्ट मैच ड्रा पर समाप्त हुआ और सीरीज का अंतिम टेस्ट मैच अब ब्रिस्बेन में खेला जाना है। आज तीसरे टेस्ट का अंतिम दिन था और भारतीय बल्लेबाजों ने अपने बल्ले से कमाल दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों को विकेट के लिए तरसा दिया। पहले तो विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत ने 97 रनों की धमाकेदार पारी खेली और टीम की हार को टाल दिया, आपको बता दें की पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए रिषभ पंत की कोहनी पर चोट लगी थी जिसके बाद दूसरी पारी में उनका बल्लेबाजी के लिए आना मुश्किल लग रहा था पर इस युवा खिलाड़ी ने हिम्मत दिखाते हुए जबरदस्त खेल दिखाया। हालांकि पंत 3 रन और बना लेते तो ये ऑस्ट्रेलिया की धरती पर उनका दूसरा शतक होता।

जिस तरीके से रिषभ पंत और पुजारा की जोड़ी मैदान पर टिक चुकी थी, सबको ऐसा लग रहा था की शायद भारतीय टीम इस मुकाबले को जीत भी सकती है क्योंकि पंत ने तेज गति से रन बनाने शुरू कर दिए थे और उनके साथ ही पुजारा ने भी पारी को संभालकर रखा लेकिन जैसे ही पंत का विकेट निकला, ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा फिरसे मजबूत हो गया, पंत के बाद पुजारा ने भी गति पकड़ी पर शतक के करीब नहीं पहुंच सके और अपना विकेट गंवा बैठे। ऐसे में अगर इन दोनों की जोड़ी लंबा खेल जाती तो भारतीय टीम सिडनी में 43 साल बाद इतिहास रच देती पर ऐसा नहीं हो पाया। बता दें की 1978 में बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में भारतीय टीम ने सिडनी में अपना अंतिम टेस्ट मैच जीता था, उसके बाद भारत को इस मैदान पर जीत नसीब नहीं हुई।

इस मैच में एक समय ऐसा भी आया जब पंत और पुजारा आउट हो गए, जडेजा चोटिल होने के कारण बल्लेबाजी करने नहीं आ सकते थे, ऐसे में लग रहा था की शायद ऑस्ट्रेलिया टीम इस मुकाबले को जीत लेगी पर जिस तरीके से हनुमा विहारी और अश्विन ने बल्लेबाजी की, ऑस्ट्रेलिया के होश उड़ा के रख दिए। हनुमा विहारी ने 161 गेंदों का सामना करते हुए 23 रन बनाए और इस मैच को ड्रा करने में बड़ा योगदान दिया, वहीं अश्विन ने भी अपना शानदार खेल दिखाते हुए 128 गेंदों पर 39 रन बना डाले। यह दोनों खिलाड़ी नाबाद लोटे और टीम को हार के मुंह से निकालने में सफल रहे। शायद अगर रविंद्र जडेजा चोटिल ना होते और बल्लेबाजी करने आते तो ये मुकाबला टीम इंडिया के हाथों में होता और सिडनी में जीतने का सपना भी पूरा हो जाता।

अब अगला टेस्ट मैच ब्रिस्बेन में 15 जनवरी को खेला जाना है और दोनों टीमें इस मुकाबले को जीतने के लिए पूरा जोर लगाएंगी क्योंकि सीरीज अभी 1-1 से बराबरी पर है और दोनों ही टीमों के पास सीरीज जीतने का बड़ा मौका होगा। देखने वाली बात होगी की अगले मैच में टीमो में क्या बदलाव देखने को मिलते है और कौन सी रणनीति लेकर दोनों टीमें मैदान पर उतरती है। अगर भारतीय टीम इस सीरीज को जीतने में कामयाब रहती है तो ये उनकी ऑस्ट्रेलिया की धरती पर लगातार जीती गयी दूसरी टेस्ट सीरीज होगी। क्योंकि 2018-19 में भी टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराया था।

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