PFI पर लगे बैन को लेकर मोदी सरकार पर भड़के ओवैसी , बोले – ये मुसलमान पर है प्रतिबन्ध, पूछे कई सवाल

केंद्र सरकार द्वारा पीएफआई पर 5 साल के लिए लगाए गए बैन के फैसले के खिलाफ ओवैसी खड़े हो गए हैं। ओवैसी ने दनादन ट्वीट करते हुए कहा कि मैंने हमेशा पीएफआई के दृष्टिकोण का विरोध किया है और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण का समर्थन किया है, पीएफआई पर इस प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया जा सकता है.

ओवैसी ने कहा कि अपराध करने वाले कुछ व्यक्तियों के कार्यों का मतलब यह नहीं है कि संगठन को ही प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना है कि किसी को दोषी ठहराने के लिए केवल किसी संगठन से जुड़ना पर्याप्त नहीं है.लेकिन इस तरह का कठोर प्रतिबंध खतरनाक है क्योंकि यह किसी भी मुसलमान पर प्रतिबंध है जो अपने मन की बात कहना चाहता है.

ओवैसी ने कहा कि जिस तरह से भारत का चुनावी निरंकुशता फासीवाद के करीब पहुंच रहा है, भारत के काले कानून, यूएपीए के तहत अब हर मुस्लिम युवा को पीएफआई पैम्फलेट के साथ गिरफ्तार किया जाएगा।

हैदराबाद के सांसद ने कहा कि अदालतों द्वारा बरी किए जाने से पहले मुसलमानों ने दशकों तक जेल में बिताया है। मैंने यूएपीए का विरोध किया है और यूएपीए के तहत सभी कार्यों का हमेशा विरोध करूंगा। यह स्वतंत्रता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है.

ओवैसी ने कहा कि हमें याद रखना चाहिए कि कांग्रेस ने इसे सख्त बनाने के लिए यूएपीए में संशोधन किया और जब बीजेपी ने इसे और भी कठोर बनाने के लिए कानून में संशोधन किया, तो कांग्रेस ने इसका समर्थन किया।यह मामला कप्पन की समय-सीमा का अनुसरण करेगा, जहां किसी भी कार्यकर्ता या पत्रकार को बेतरतीब ढंग से गिरफ्तार किया जाता है और जमानत पाने में भी 2 साल लगते हैं

मोदी सरकार से सवाल पूछते हुए ओवैसी ने कहा कि पीएफआई पर प्रतिबंध कैसे लगा लेकिन खाजा अजमेरी बम धमाकों के दोषियों से जुड़े संगठन पर नहीं लगा ?सरकार ने दक्षिणपंथी बहुसंख्यक संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया?

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