प्रदेश में 60 फीसदी कम हुआ मलेरिया , 2027 तक आंकड़ा शून्य करने का है योगी सरकार का लक्ष्य

उत्तरप्रदेश को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए ट्रेस , टेस्ट और ट्रीट की रणनीति अपनाई गई है । मलेरिया रोगी चिह्नित कर उपचार कराने वाली एएनएम को 75 रुपये मानदेय दिया जा रहा है । जिस क्षेत्र में मरीज मिल रहे हैं , यहां मलेरियारोधी अभियान चलाया जा रहा है ।

उत्तर प्रदेश में मलेरिया करीब 60 % कम हुआ है। वहीँ अति संवेदनशील बरेली , बदायूं और सोनभद्र में यह नियंत्रित है । यहां एक हजार की आबादी पर एक से भी कम मामले मिल रहे हैं । इसे बरकरार रखने के लिए कोविड की तर्ज पर निरंतर अभियान चलाने की रणनीति बनाई गई है ।

योगी सरकार का प्रदेश में वर्ष 2027 तक मलेरिया केस शून्य करने का लक्ष्य है । जिन जिलों में लगातार तीन साल तक मलेरिया के केस नहीं मिलेंगे , उसे मलेरिया मुक्त घोषित किया जाएगा । जिन जिलों में एक हजार की आबादी में एक से कम केस हैं , उसे नियंत्रित जिले की श्रेणी में माना जाता है ।बता दें कि मलेरिया प्रभावित जिलों के समूह 2 से समूह एक में आने के लिए उत्तर प्रदेश को सम्मानित किया जा चुका है ।

विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल जनवरी से जून तक 13 लाख सँपल की जांच की गई । इनमें 1,300 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी । इस साल जून तक 26.77 लाख सैंपल की जांच की गई । इनमें से 1,077 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है । इस तरह पॉजिटिविटी की दर करीब 60 फीसदी कम हुई है । अब कोविड की तर्ज पर जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है , लगभग एक करोड़ से अधिक लोगों की जांच करने का लक्ष्य रखा गया है ।

इसके तहत आशा और एएनएम को जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया है । उन्हें जांच किट मुहैया करई गई है । जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है , उनकी तीसरे दिन , सातवें दिन और 14 वें दिन जांच करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है । उधर , बस्ती व अंबेडकरनगर में पिछले साल एक भी केस नहीं मिला था । अगर तीन साल तक यहां कोई केस नहीं मिलता तो यह दोनों जिले मलेरियामुक्त घोषित कर दिए जाते पर अंबेडकरनगर में इस साल एक केस मिल गया है । ऐसे में यह जिला फिर से सामान्य श्रेणी में आ गया है ।

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