स्वतंत्रता के सबसे बड़े महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कैसे मनाया था आजादी का जश्न,जानकर हो जाएंगे आप हैरान

आज पूरे भारत में आजादी का जश्न जोरों शोरों से मनाया जा रहा है ।आज हिंदुस्तान का आसमान तिरंगे के रंग में रंग गया है और जमीन में उत्साह की गर्जना है। और यह उत्साह हो भी क्यों ना भारत ने 200 वर्षो के लंबे संघर्ष के बाद आजादी हासिल की थी यह आजादी आसान नहीं थी इस आजादी के लिए हमारे देश के वीर सपूतों ने अपने लहू से इस धरती को सींचकर कर इसमें आजादी का बीज बोया है। जब आजादी के संघर्ष की बात आती है तो वह नाम सबसे पहले आता है जिसने पूरे देश को आजादी की लड़ाई के प्रति जागृत किया था वह नाम है मोहनदास करमचंद गांधी जिन्हें यह देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से पूजता है। महात्मा गांधी ही वे महापुरुष थे जिन्होंने सबसे पहले राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का आवाहन किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बलिदान और संघर्ष का भारत की आजादी में एक बहुत बड़ा योगदान रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं जब सालों के संघर्ष के बाद ब्रिटिश हुकूमत से भारत को आजादी मिली तब महात्मा गांधी ने इस आजादी के जश्न को कैसे मनाया था। आजादी के पहले जश्ने से जुड़ा महात्मा गांधी का यह तथ्य बेहद हैरान कर देने वाला है।

15 अगस्त 1947 के दिन जब दिल्ली और पूरे देश में आजादी की लहर दौड़ रही थी पूरा देश उत्साह में डूबा हुआ था देशभक्ति तरानो से हिंदुस्तान का आसमान गूंज रहा था । देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सरदार वल्लभभाई पटेल समेत तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दिल्ली में आजादी के पहले जश्न का उत्साह बना रहे थे लेकिन इस पूरे उत्साह के बीच आजादी के सबसे बड़े मतवाले कहे जाने वाले बापू इस पूरे जश्न से कहीं दूरी बना रखे थे। यह तथ्य बेहद हैरान कर देने वाला है लेकिन उतना ही सच है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी का जश्न नहीं बनाया था बल्कि आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को उन्होंने अनशन रखा हुआ था।

दरअसल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 15 अगस्त 1947 के दिन बंगाल के नोआखली में थे जहां वे हिंदू और मुसलमानों के बीच हुए दंगों को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे। यह विभाजन के बाद का वह समय था जब देश में लोग साम्प्रदायिक खून की नदियां बहा रहे थे ऐसे हिंसा से महात्मा गांधी बेहद दुखी थे वह हिंसा को रोकना चाहते थे जिसके लिए वह बंगाल की राजधानी कोलकाता में अनशन कर रहे थे।

आजादी के जश्न में शरीक होने के लिए तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने महात्मा गांधी को खत लिखा था जिसमें उन्होंने जश्न में सम्मिलित होने का निवेदन किया था लेकिन इसके बावजूद महात्मा गांधी ने आने से इंकार कर दिया महात्मा गांधी ने पत्र लिखकर भेजा जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं आजादी के इस दिन आनंदित नहीं हो सकता दुर्भाग्य से हमें जिस तरह की आजादी मिली है उसने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के बीज भी हैं। आज जब पूरा बंगाल चल रहा है खून की नदियां बह रही हैं ऐसे में भला मैं कैसे अपने दिल में रोशनी लेकर आजादी के जश्न में शरीक हो सकता हूं।

कहा जाता है कि उन दिनों आजादी के उत्साह से ज्यादा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बंटवारे के दर्द से पीड़ित थे जिसको लेकर उन्होंने स्वतंत्रता का उत्साह ना बनाने का निर्णय लिया था। यही वजह थी कि 15 अगस्त 1947 के दिन दिल्ली के जश्न ए आजादी में महात्मा गांधी नहीं पहुंचे थे।

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