राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे पर भावुक हुए सभापति वेंकैया नायडू, कहा – पीड़ा बयां नही कर सकता, रात भर …

मानसून सत्र के शुरुआत से ही संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने हंगामे से आगाज किया था वही हंगामा पूरे सत्र चलता रहा कभी सदन में शीशे टूटने का मामला सामने आया तो कभी सभापति के पटल पर कागज के पंछी उठा ले गए। पेगासस कृषि कानून और कोरोना के मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों ने सदन की मर्यादाओं को कई बार लांघा वहीं बीते दिन मंगलवार को राज्यसभा में कृषि कानूनों के खिलाफ विपक्ष के सांसदों ने हंगामा करते हुए सदन में रखी टेबल पर चढ़ गए और हंगामा करने लगे। इस हंगामे को जहां सरकार ने तो शर्मनाक बताया ही वहीं राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने विपक्ष के रवैया पर वेदना प्रकट की है।

बुधवार को राज्यसभा की कार्रवाई शुरू होते ही सभापति वेंकैया नायडू ने मंगलवार की घटना को लेकर संवेदना जाहिर करते हुए संदेश पढ़ा वेंकैया नायडू ने कहा कि हमारा देश मंदिर चर्च मस्जिद और गुरुद्वारा की धरती है। वहीं संसद लोकतंत्र के मंदिर के रूप में जाना जाता है सदन की जिस टेबल पर सदन के अधिकारी बैठते हैं वह सदन की पवित्र जगह मानी जाती है। वेंकैया नायडू ने कहा कि बीते दिन इस पवित्रता को नष्ट कर दिया गया । जब कृषि कानूनों का विरोध करते हुए कुछ सदस्य टेबल पर चढ़ गए और हंगामा करने लगे तब इस सदन की सारी पवित्रता समाप्त हो गई उन्होंने कहा कि मैं इस बात से काफी व्यथित हूं कि मानसून सत्र में विपक्ष ने बुरी तरह हंगामा किया उन्होंने ने कहा कि आप की ओर से किसी भी मसले पर बहस की जा सकती है और अलग-अलग राय हो सकती है लेकिन जिस तरह से हंगामा किया गया था वह सदन की गरिमा के विरुद्ध है लोकतंत्र के मंदिर की पवित्रता को भंग किया गया है अपना दुख और पीड़ा बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है मैं रात भर सो नहीं पाया।

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