विजय रुपाणी के इस्तीफे के बाद बेटी राधिका हुई भावुक,कहा -आतंकी हमले में मोदी से पहले पहुंचे थे मेरे पिता…

गुजरात की राजनीति में शनिवार का दिन एक बड़ा उलटफेर लेकर सामने आया। सीएम के तौर पर सुबह विजय रुपाणी ने एक कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिरकत की। तब तक सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन उस वक्त पूरे देश का सियासी गलियारा चौक गया जब अचानक दोपहर को विजय रुपाणी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

राधिका रुपाणी ने अपने पिता को लेकर फेसबुक के जरिए लिखा एक भावुक पोस्ट

इस्तीफा देने के बाद विजय रुपाणी ने कहा कि अब गुजरात का नेतृत्व एक नई ऊर्जा के साथ नए हाथों में होगा। इस्तीफे के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भूपेंद्र पटेल को सौंपी गई। हालांकि विजय रुपाणी ने किसी भी प्रकार से मुख्यमंत्री पद जाने का अफसोस या नाराजगी नहीं जताई ।

लेकिन अब उनकी बेटी राधिका रुपाणी का अपने पिता के इस्तीफे पर कहीं न कहीं दर्द छलकता नजर आ रहा है। राधिका रुपाणी ने अपने पिता को लेकर एक भावुक पोस्ट अपने फेसबुक के जरिए लिखा है। जिसमें वे अपने पिता के स्वभाव और उनके राजनीतिक सफर के विषय मे बता रही हैं।

मेरे पिता का कार्यकाल 1979 मोरबी की बाढ़ से हुआ शुरू

विजय रुपाणी की बेटी राधिका रुपाणी ने अपने फेसबुक पोस्ट पर पिता का जिक्र करते हुए लिखा कि ” बहुत सारे राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके कार्य और भाजपा कार्यकाल की बातें करते हुए छोटी-छोटी बातें कहीं हैं मैं उन सभी की आभारी हूं।

उनके अनुसार पिताजी का कार्यकाल एक कार्यकर्ता से शुरू हुआ जिसके बाद चेयरमैन, महापौर ,राज्यसभा के सदस्य ,टूरिज्म चेयरमैन ,भाजपा के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री रहे लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है ।मेरी नजर में मेरे पिता का कार्यकाल 1979 मोरबी की बाढ़ से शुरू होकर कच्छ के भूकंप ,गोधरा कांड ,बनासकांठा में बाढ़ ,ताउते और कोरोना महामारी में हर पल काम करते रहने तक भी है।

राधिका ने कहा कि मेरे पिता ने कभी अपने व्यक्तिगत काम को नहीं देखा जो जिम्मेदारी मिली उसे सबसे पहले निभाया। कच्छ के भूकंप में भी लोगों की सहायता के लिए सबसे पहले गए थे ।राधिका आंगेबकहती हैं बचपन में कभी हमें माता-पिता घुमाने नहीं ले जाते थे बस कार्यकर्ता के यहां ले जाते थे यह उनकी परंपरा रही है।

आतंकी हमले में मेरे पिता पीएम नरेंद्र मोदी से पहले मंदिर परिसर में पहुंचे थे

राधिका ने कहा कि स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में आतंकी हमले के वक्त मेरे पिता वहां पहुंचने वाले सबसे पहले शख्स थे वह पीएम नरेंद्र मोदी से पहले मंदिर परिसर में पहुंचे थे ।बहुत कम लोग जानते होंगे कि जब ताऊते आया तो वह रात के 2 बजे तक सीएम डेस्क बोर्ड के जरिए लोगों से संपर्क कर रहे थे ।वर्षों तक हमारे घर का एक ही प्रोटोकोल था कि किसी का रात को 3 बजे भी फोन आए तो विनम्रता से बात करनी है।

क्या इंसान में संवेदनशीलता और शालीनता नहीं होनी चाहिए?

राधिका ने कहा कि मैंने एक हेडलाइन पढ़ी जिसमें लिखा हुआ था कि “विजय रुपाणी की मृदुभाषी छवि ही उनके विरुद्ध साबित हुई” राधिका ने कहा कि मुझे एक सवाल पूछना है क्या इंसान में संवेदनशीलता और शालीनता नहीं होनी चाहिए? क्या हम एक नेता में ये जरूरी गुण नहीं खोजते हैं?

राधिका ने कहा कि हमारे घर में कई बार इस मामले पर बातचीत भी हुई जब इतना सारा भ्रष्टाचार और नकारात्मकता राजनीति में है तो ऐसे में बहुत सरल स्वभाव के साथ क्या टिक पाएंगे लेकिन पिताजी हमेशा एक ही बात कहते हैं राजनीति की छवि फिल्मों और पुराने लोगों ने गुंडे और मनमानी करने वाले जैसी बना दी है हमें इस छवि को बदलना है पिताजी कभी गुटबाजी या साजिश को समर्थन नहीं देते यह उनकी खासियत है।

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